Corrupt Officer Indore: आइडीए के रिटायर्ड इंजीनियर की डेढ़ करोड़ की संपत्ति जब्त

By Abhishek Raghuvanshi
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Corrupt Officer Indore: ऐसे ही एक भ्रष्ट अधिकारी के जब्त घर में चल रहा सरकारी स्कूल।

 इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) के रिटायर्ड कार्यपालन यंत्री विमल गंगवाल की करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्लू) इंदौर ने जब्त कर लिया है। इसमें कई दुकानें, मकान और खेती की जमीन शामिल है। कुछ साल पहले ऐसे ही एक भ्रष्ट अधिकारी पर कार्रवाई की गई थी। जिसके जब्त मकान में सरकारी स्कूल का संचालन किया जा रहा है।

ईओडब्लू एसपी धनंजय शाह ने बताया कि आरोपित विमल गंगवाल कार्यपालन यंत्री, इंदौर विकास प्राधिकरण के यहां पर छापा मार कर आय से अधिक संपत्ति भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज किया गया था। जिसका चालान भी हम 2016 में प्रस्तुत कर चुके हैं। आरोपित और उसके स्वजन के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति थी। इस संपत्ति को कुर्क करने हेतु विशेष न्यायाधीश विकास शर्मा के न्यायालय में आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 1944 के अंतर्गत आवेदन दिया गया था। तीन दिनों में ही इसकी अनुमति मिल गई।

शाह ने बताया कि हमने उप पुलिस अधीक्षक अजय जैन, निरीक्षक विनोद सोनी की टीम बनाई थी। जिसने संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। विमल कुमार गंगवाल एवं स्वजन को कार्यवाही के संबंध एक अक्टूबर को पक्ष रखने के लिए कहा गया है।

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कुल 18 संपत्तियों को किया गया जब्त

डीएसपी जैन के अनुसार गंगवाल और उसके परिवार की वर्तमान में लगभग 18 स्थानों पर संपत्ति है, जिसमें बसंत बिहार कालोनी तथा स्नेहलतागंज में आलीशान मकान, मेट्रो टावर में सात दुकानें हैं। जंजीरवाले चौराहे पर एक दुकान है। स्कीम नंबर-97 ग्राम राऊ, ग्राम करवासा, ग्राम डेहरिया, बड़वाह में भी भूमि मिली हैं।

यह था मामला

ईओडब्लू ने वर्ष 2010 में गंगवाल के ठिकानों पर छापा मार कार्रवाई की थी। जिसमें विमल कुमार गंगवाल इनकी पत्नी मीना गंगवाल, इनकी द्धितीय पत्नी स्व. प्रतिभा गंगवाल तथा पुत्र नितिन गंगवाल को आरोपित बनाया था। जांच में इनके द्वारा अपनी अवैध कमाई से स्वयं के नाम के साथ अन्य नामों से भी संपत्ति क्रय की गई थी। मामले में कोर्ट ने पत्नी और बेटे को भी जेल भेजा गया था।

यह हो सकता है आगे

जानकारी के अनुसार यह अभी अंतरिम आदेश है। अभी गंगवाल और उसके स्वजन को पक्ष रखने का मौका दिया गया है। ईओडब्लू जब्त संपत्ति की जानकारी शासन को देगी। इसके बाद इसे नीलाम भी किया जा सकता है। वहीं अगर शासन चाहे तो इसका उपयोग शासकीय कार्यालय के रूप में भी कर सकती है।

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