CDSCO ने बंद कराई ‘जहरीला’ सिरप बनाने वाली फैक्ट्री, राज्य ने जगह बदल बहाल कर दिया

By Abhishek Raghuvanshi
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लायसेंस; सिस्टम पर उठे सवाल
इंदौर की रीमन लैब्स, जिसे जहरीला कफ सिरप बनाने पर सीडीएससीओ ने 2023 में बंद कराया था, अब नए स्थान कंपेल में फिर शुरू हो गई है। जांच में खतरनाक रसायन डाइएथिलिन ग्लायकोल (DEG) की पुष्टि के बावजूद राज्य औषधि विभाग ने उसी नाम और संचालक के साथ नया लाइसेंस जारी कर दिया। इससे केंद्र-राज्य एजेंसियों के तालमेल पर गंभीर सवाल उठे हैं।
जहरीला सिरप बनाने वाली रीमन लैब्स ने बदली जगह।
सीडीएससीओ ने बंद कराई फैक्ट्री, राज्य ने फिर खोली।
केंद्र-राज्य एफडीए समन्वय की कमी पर उठे सवाल।
इंदौर: जहरीला कफ सिरप बनाने के मामले में केंद्र किसी फैक्ट्री को बंद करवाता है तो राज्य उसे दूसरी जगह खुलवा देता है। इंदौर में ऐसा ही मामला सामने आया है। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने सांवेर रोड की दवा फैक्ट्री रीमन लैैब्स को बंद करने का आदेश दिया था। संदूषित और जहरीले रसायन डाइएथिलिन ग्लायकोल (DEG) वाला कफ सिरप बनाने की पुष्टी होने के बाद अगस्त 2023 में यह कार्रवाई की गई थी। तब सांवेर रोड के सेक्टर-ई में यह फैक्ट्री संचालित हो रही थी।
WHO के अलर्ट पर की जांच
मुश्किल से सालभर बाद वही दवा फैक्ट्री इंदौर के दूसरे क्षेत्र कंपेल पर शुरू हो गई। जांच में अमानक दवा बनाने की पुष्टी होने के बाद भी फैक्ट्री का जगह बदलकर संचालित होना सिस्टम पर सवाल पैदा कर रहा है और आरोप भी लग रह हैं कि केंद्र और राज्य के एफडीए की पटरी नहीं बैठ रही। अफ्रीका में भारत से बनकर पहुंची नेचर कोल्ड नाम की एक दवा से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी। यह दवा इंदौर की रिमन लैब से बनकर वहां निर्यात हुई थी।
WHO ने अलर्ट जारी किया तो केंद्र और राज्य की टीमें जांच के लिए इंदौर के सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री पर पहुंचे। वहां दवा तो मिली ही जांच में उसमें जहरीला तत्व मानक स्तर से कई गुना ज्यादा भी मिला। इसके बाद आदेश जारी कर दिया गया कि दवा फैक्ट्री का उत्पादन बंद किया जाए। तुरंत प्रभाव से सांवेर रोड की फैक्ट्री बंद करवा दी गई। हालांकि, बमुश्किल छह महीने बाद ही दवा फैक्ट्री का लायसेंस नए स्थान पर जारी कर दिया गया। ना फैक्ट्री का नाम बदला ना उसके संचालक और ना ही लायसेंस। दरअसल मामला पकड़ में आने से पहले दवा कंपनी ने अपनी नई फैक्ट्री का निर्माण शुरू कर दिया था।ऐसे में केंद्र की कार्रवाई से ना उसे किसी तरह का फर्क नहीं पड़ा बल्कि सरकारी अधिकारियों ने पहले फैक्ट्री बंद करवाने का ऐलान कर अपनी पीठ थपथपाई और पीछे से नई जगह लायसेंस भी दे दिया। बहाना ऐसा कि वो दवा न बने केंद्र के आदेश को किनारे कर राज्य के खाद्य औषधि प्रशासन ने दवा कंपनी का लायसेंस नई जगह पर जारी कर दिया।अब जब छिंदवाड़ा में डाइएथिलिन ग्लायकोल वाली खांसी की दवा से बच्चों की मौत का मामला सामने आया है तो वहां घेरे में आई दवा कंपनी को पूरी तरह बंद करवाने के साथ उसके संचालकों पर तुरत-फुरत में एफआइआर भी कर दी गई। एक जैसे मामलों में दो तरह की कार्रवाई के बाद प्रदेश के अफसर घेरे में है। राज्य का औषधि प्रशासन सफाई दे रहा है कि लायसेंस जारी करते हुए शर्त डाल दी गई कि जो दवा अमानक निकली उसका उत्पादन कंपनी ना करें। फैक्ट्री के संचालक भी स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने नई फैक्ट्री खोल ली है। जो दवा अमानक निकली उसका उत्पादन नहीं कर रहे क्योंकि अनुमति नहीं मिली।

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