हंगामा:सराफा में चौपाटी वालों को 9.30 बजे घुसने से रोका तो धरने पर बैठे

By Abhishek Raghuvanshi
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सराफा बाजार में बुधवार रात बड़ा हंगामा हो गया। तय व्यवस्था के अनुसार चौपाटी रात 9.30 बजे बाद शुरू होनी थी, लेकिन संचालक इससे पहले अंदर घुसने लगे तो निगमकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। विवाद बढ़ा तो चौपाटी संचालक विरोध में वहीं धरने पर बैठ गए।
निगम ने दो दिन से मुनादी के जरिये ऐलान करवाया था कि सराफा में खाने-पीने की दुकानें रात 9.30 बजे के बाद ही लगाई जाएंगी। फिर भी बुधवार को संचालक रात 8 बजे से ही अंदर जाने की कोशिश करने लगे। निगम की टीमें सराफा में जाने वाले सभी रास्तों पर तैनात थीं और जो भी ठेला या सामग्री लेकर अंदर जाने लगा, उसे रोक दिया गया। कहासुनी बढ़ी और कई संचालक धरने पर बैठ गए। पुलिस की समझाइश के बाद देर रात साढ़े दस बजे चौपाटी शुरू हुई।
80 परंपरागत दुकानों को शुरुआत में अनुमति थी।
300 दुकानें अब सराफा चौपाटी में लग रही हैं।
दो साल पुराना टकराव
पिछले दो साल से सराफा के सोना-चांदी ज्वैलर्स और चाट-चौपाटी संचालकों के बीच टकराव चल रहा है। ज्वैलर्स का तर्क है कि शाम 7 बजे से चौपाटी लगने से कारोबार प्रभावित होता है, क्योंकि ठेलों की वजह से जेवर खरीदने आने वाले ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच पाते। इससे सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है। खासकर सिलेंडर के कारण, जबकि चौपाटी संचालक इसे रोजगार और सराफा की खाद्य संस्कृति से जोड़कर देखते हैं।
2024 से विवाद जारी
2024 में हरदा पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद इंदौर की सराफा चौपाटी की जांच की बात उठी।
फरवरी 2024 को चाट-चौपाटी के संचालन व सुरक्षा इंतजाम को लेकर समिति गठित की गई।
फरवरी 2024 में ही 13 बाजारों के एसोसिएशन ने चौपाटी को हटाने का समर्थन किया।
एमआईसी सदस्यों की समिति ने निरीक्षण के बाद माना कि यह बारूद के ढेर पर है।
अगस्त 2025 में चांदी-सोना जवाहरात एसोसिएशन ने शपथपत्र भरवाएं और तय किया गया कि सोने-चांदी की दुकानें रात 10 बजे तक खुली रहेंगी।
इस मसले पर बात करने के लिए तीन से चार बार महापौर और निगमायुक्त से मुलाकात की।

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