सालभर मध्य प्रदेश की जेल में रहा बेगुनाह: कलेक्टर पर 2 लाख जुर्माना; हाईकोर्ट ने कहा- बाबू ऑर्डर लिख रहे, अफसर साइन कर देते हैं

By Abhishek Raghuvanshi
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जबलपुर हाईकोर्ट ने शहडोल के कलेक्टर पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत की ओर से यह जुर्माना एक शख्स के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए लगाया है। अदालत ने कलेक्टर को अगली सुनवाई पर कोर्ट में हाजिर होने का

जबलपुर: राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करना और गलत हलफनामा प्रस्तुत करने को एमपी हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने शहडोल कलेक्टर केदार सिंह पर दो लाख रुपए की कॉस्ट लगाते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है। अवमानना की कार्रवाई पर अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की गयी है। कलेक्टर को कॉस्ट की राशि व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ता के बेटे के खाते में जमा करने के आदेश जारी किए हैं।

ये है मामला

शहडोल निवासी किसान हीरामनी वैश्य ने उसके बेटे सुषांत वैश्य पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना एनएसए की कार्रवाई का आदेश जारी किए जाने को चुनौती दी गयी थी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि एनएसए की कार्रवाई के लिए एसपी ने 6 सितम्बर 2024 को जिला कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा था। कलेक्टर ने 9 सितंबर 2024 को बिना किसी स्वतंत्र गवाह के बयान दर्ज करते हुए एनएसए की कार्रवाई के आदेश पारित कर दिए। आदेश में उनके के नाम के स्थान पर नीरज कांत द्विवेदी का नाम लिखा हुआ है। इसके अलावा एनएसए की कार्रवाई के आदेश को पुष्टि के लिए राज्य सरकार के पास नहीं भेजा गया था। जिस आपराधिक प्रकरण के आधार पर एनएसए लगाया गया है, उक्त प्रकरण में लोक अदालत के माध्यम से समझौता हो गया है।

कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया

याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर शहडोल केदार सिंह और एसपी रामजी श्रीवास्तव को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। कलेक्टर केदार सिंह ने पारित आदेश में याचिकाकर्ता के पुत्र के बजाए नीरजकांत द्विवेदी के नाम का उल्लेख किए जाने की गलती स्वीकार की है। उनकी तरफ से तर्क दिया गया था कि नीरजकांत द्विवेदी और सुशांत बैंस के मामलों की सुनवाई एक साथ की गई थी। इस तथ्यात्मक गलती के अलावा आदेश पारित करने में कोई अन्य त्रुटि नहीं है।

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हाईकोर्ट ने की यह टिप्पणी

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि एनएसए की कार्रवाई के संबंध में पारित आदेश को पुष्ठि के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाता है। जिला कलेक्टर के द्वारा एनएसए की कार्रवाई के अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजी गयी फाइल प्रस्तुत हाईकोर्ट में प्रस्तुत करें। कलेक्टर के द्वारा अनुमोदन के लिए फाइल अग्रेषित नहीं की गयी है तो राज्य को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आदेश को पुष्टि के लिए भेजा गया था तो अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग ने भी अपने विवेक का उपयोग किए बिना कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को मंजूरी प्रदान कर दी। आदेश को पढ़ने की जहमत तक नहीं उठाई गयी। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि इस संबंध में एसीएस गृह एसएस शुक्ला से हलफनामे में जवाब मांगा था।


टाइपिंग की गलती के कारण ऐसा हुआ

अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की तरफ से पेश किये गए हलफनामा में बताया गया था कि एनएसए के आदेश को अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजा गया था। टाइपिंग की गलती के कारण आदेश में याचिकाकर्ता के पुत्र के नाम के स्थान पर नीरज कांत द्विवेदी के नाम का उल्लेख किया गया है। इसके लिए क्लर्क को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ता ब्रम्हेन्द्र पाठक ने बताया कि युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि कलेक्टर केदारनाथ ने अपने हलफनामा में बताया था कि एनएसए की प्रकरण की सुनवाई के दौरान तीन व्यक्ति के बयान दर्ज किए गए थे। तीनों व्यक्ति के वही बयान थे जो उन्होंने याचिकाकर्ता के पुत्र के खिलाफ साल 2022 में दर्ज अपराधिक प्रकरण में दिये थे। उक्त आपराधिक प्रकरण में लोक अदालत के माध्यम से समझौता हो गया है। एनएसए की कार्यवाही के लिए उसी प्रकरण को आधार बताया गया है।


कोर्ट ने जताई नाराजगी

युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि एनएसए के उपयोग टूल की तरह नहीं किया जा सकता है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। एनएसए की कार्रवाई तभी की जाती है जब व्यक्ति से समाज और लोगों में भय की स्थिति उत्पन्न होती है। युगलपीठ ने कलेक्टर पर दो लाख रुपये की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाते हुए उक्त राशि याचिकाकर्ता के पुत्र के खाते में जमा करने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि कलेक्टर और अतिरिक्त प्रमुख सचिव के खिलाफ एनएसए की आदेश का अवलोकन कर कार्रवाई करें। गलत हलफनामा पेश करने पर कलेक्टर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करते हुए नोटिस जारी किए है।

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