सखी – बहिनपा मैथिलानी समूह, इन्दौर इकाई ने पूरे परंपरागत तरीके से मनाया सामा चकेवा पर्व

By Abhishek Raghuvanshi
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मिथिला की लोकसंस्कृति और प्रेम का प्रतीक है ये पर्व

इंदौर। सखी – बहिनपा मैथिलानी समूह, इन्दौर इकाई द्वारा मिथिला की लोकसंस्कृति और प्रेम के प्रतीक – सामा चकेवा पर्व को मेघदूत गार्डन में बहुत धूमधाम से मनाया गया।

इस दौरान सखी – बहिनपा मैथिलानी समूह, इन्दौर इकाई की अध्यक्ष श्रीमती आरती झा और उनके समूह ने इस पारंपरिक पर्व के बारें में बताया कि, ये सामा-चकेवा बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक प्रमुख लोकपर्व है, जो छठ पूजा के तुरंत बाद, यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी से आरंभ होकर कार्तिक पूर्णिमा तक मनाया जाता है। पूर्णिमा की रात को सामा और चकेवा की मिट्टी की मूर्तियों को नदी या तालाब में विसर्जन कर विदाई दी जाती है।

इस पर्व की उत्पत्ति भगवान श्रीकृष्ण की पुत्री सामा और उनके भाई चकेवा से जुड़ी एक लोककथा से मानी जाती है। कथा के अनुसार, जब सामा पर झूठा आरोप लगाकर उन्हें अन्याय का सामना करना पड़ा, तब उनके भाई चकेवा ने उन्हें न्याय दिलाया। इसी भाई-बहन के प्रेम और निष्ठा की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

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इंदौर में रहने वाले इन मैथिलानियों के ग्रुप ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेकर परंपरागत रूप से मिट्टी से सुंदर मूर्तियाँ – सामा, चकेवा, सुग्गा, डमरू, आटा चक्की आदि – बनाती हैं और उन्हें सूप में सजाकर पूजा की और सामूहिक रूप से लोकगीत गाकर धूमधाम से मनाया।

सामा-चकेवा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह मिथिला की जीवंत लोकसंस्कृति, परिवारिक स्नेह, और समाज में भाईचारे की भावना का प्रतीक है।

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