
पीपल्याराव में शनिवार को मकान की नपती के लिए गई निगम की टीम के विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि भंवरकुआं थाने पर रविवार सुबह 5 बजे तक हंगामा चलता रहा। गहमागहमी के बीच पुलिस ने तीन केस दर्ज किए हैं।
पहला केस शाम 7 बजे एआरओ शैलेंद्र सिंह के खिलाफ तो दूसरा केस रात 11.20 बजे एआरओ की शिकायत पर पार्षद पति सुनील हार्डिया, उनके बेटे अटल और ट्रेवल्स संचालक बीरम सोलंकी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा व अभद्रता का दर्ज किया।
तीसरी एफआईआर इंद्रपुरी की बिंदुु यादव की शिकायत पर अज्ञात निगमकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुई है। बिंदु ने शिकायत में बताया, निगम के चार अफसर आते ही नपती लेने लगे। पार्षद को बुलाने को कहा तो धमकाने लगे। फिर सेटलमेंट के लिए रुपयों की मांग की।
कभी बोर्ड कांड तो कभी रिमूवल पर भड़के
चंदन नगर बोर्ड कांड में निलंबित अफसरों को बहाल किए जाने के मामले में परिषद सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों ने निगमायुक्त और अपर आयुक्त से सवाल-जवाब किए। पहला मौका था जब बहाली को लेकर पार्षद मुखर हुए।
एबी रोड पर पीयू-4 क्षेत्र में निगम की टीम ने डॉ. इजहार मुंशी की चार मंजिला बिल्डिंग को अवैध बताकर विस्फोट करके ध्वस्त कर दिया था। मामला नगरीय प्रशासन मंत्री तक पहुंचा। पार्षद और जनप्रतिनिधियों ने फोन लगाया तब भी कार्रवाई नहीं रुकी। मंत्री ने सार्वजनिक कार्यक्रम में इस पर नाराजगी जताई थी।
एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, मनीष शर्मा, निरंजन सिंह चौहान ने इस बात को लेकर कई बार एमआईसी की बैठक में शिकायत की कि अफसर फोन नहीं उठाते और शर्मा ने आरोप लगाया कि मेरे विभाग से संबंधित जानकारी मांगने पर नहीं दी जाती है।
विधानसभावार समस्याओं को लेकर हुई बैठक में पार्षद पूर्व अधीक्षण यंत्री पर यह कहते हुए बिफरे कि काम नहीं करते हैं। जनता हमसे सवाल पूछती है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
अक्टूबर में मालवा मिल ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में भी विवाद सामने आया था। लोकार्पण कार्यक्रम सुबह रख दिया गया, जबकि सीएम दोपहर में आने वाले थे। इस पर विभाग प्रभारी एमआईसी सदस्य से इसे स्थगित करने की बात हुई लेकिन वे भी नहीं माने। इसी दिन नेहरू पार्क में सीएम द्वारा स्वच्छता कर्मियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, लेकिन उसकी जानकारी किसी जनप्रतिनिधि को नहीं थी।
पार्षद कमलेश कालरा और निगम कर्मचारी के विवाद का ऑडियो भी सामने आया था। वे इस बात पर गुस्सा होते नजर आए कि कर्मचारी सुनते नहीं और मनमानी की जाती है।
सेवानिवृत्त रिमूवल अधिकारी लता अग्रवाल को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव एमआईसी में रखा गया तो उसे भी नामंजूर कर दिया गया। वजह यह सामने आई कि रिमूवल के दौरान वे जनप्रतिनिधियों की नहीं सुन रही थीं।
