16 शोधार्थियों को प्रदान की पी.एच.डी. उपाधि
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में बुधवार को डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू का 7वां दीक्षांत समारोह अभूतपूर्व उत्साह, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान के साथ संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय में समारोह का शुभारंभ संविधान के शिल्पकार युग पुरुष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि से हुआ। साथ ही 76वें संविधान दिवस के अवसर पर डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर जी की प्रतिमा के पास संविधान प्रस्तावना का वाचन भी किया गया।
राज्यपाल श्री पटेल ने दीक्षान्त समारोह में उपाधियाँ प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी एवं उनके उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। इस दौरान उन्होंने डॉ. अम्बेडकर के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मूल मंत्र को याद दिलाया और बाबा साहब के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “शिक्षा का उद्देश्य केवल आजीविका कमाना नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। आप सभी युवाओं को डॉ. अम्बेडकर के सपनों का भारत बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी, जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त हो,”। श्री पटेल ने विद्यार्थियों से सामाजिक न्याय, समरसता और समावेशी विकास के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। श्री पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान को सच्ची सामाजिक समरसता और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। आप सभी इस विश्वविद्यालय के सामाजिक न्याय के दूत हैं। यह ज्ञान आपको सुविधाभोगी नहीं, बल्कि संवेदनशील नागरिक बनाए।
राज्यपाल श्री पटेल ने सभी विद्यार्थियों से अपने माता-पिता और गुरुजनों का आजीवन सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि माता-पिता कई कष्टों को झेलकर अपने बच्चों लालन पालन। करते हैं। जीवन में अपने माता-पिता का सदैव सम्मान करें और उनकी सेवा करें, तभी हम अपने समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकेंगे और हमारा जीवन बेहतर होगा।
मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि महू डॉ. अम्बेडकर की जन्मभूमि है और इस धरा पर स्थित यह विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने युवा शक्ति को राज्य और राष्ट्र के विकास की धुरी बताया। उन्होंने विशेष रूप से सामाजिक-आर्थिक असमानताओं पर शोध करने और उनका व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए विश्वविद्यालय के शोधार्थियों की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि यह संस्थान सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध और अध्ययन को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने शोध कार्यों को सीधे जनहित और राज्य की विकास योजनाओं से जोड़ें। विधायक सुश्री उषा ठाकुर ने भी सभी को बधाई देते हुए कहा कि जिन विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई है, वे अपनी प्रतिभा का उपयोग अभीष्ट उद्देश्य की प्राप्ति के लिए करें।
समारोह को सारस्वत अतिथि डॉ. रविंद्र कन्हेरे एवं कुल गुरु डॉ. रामदास आत्राम ने भी संबोधित कर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि संस्थान के शोधकार्य सीधे हमारी ग्रामीण विकास योजनाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा के कार्यक्रमों में सहायक बनें। आपका शोध केवल पुस्तकालयों तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों, गाँवों और बस्तियों तक पहुँचे।
दीक्षांत समारोह में संस्थान के 16 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के कुलगुरु द्वारा उपस्थित उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दीक्षा व प्रतिज्ञा दिलाई गई। विश्वविद्यालय प्रकाशनों ‘स्मारिका’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री रामलाल अत्राम एवं आभार कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा ने माना।
