स्वास्थ्य विभाग कितना लापरवाह और उदासीन है, इसका एक और मामला मंगलवार को सामने आया। हालत ये है कि जिस अस्पताल में दांत का इलाज ही नहीं होता, वहां डेंटिस्ट नियुक्त कर रखा है। तीन अस्पताल ऐसे भी हैं, जहां डेंटिस्ट तो नियुक्त हैं, लेकिन रूट कैनाल ट्रीटमेंट नहीं हो रहा। यहां जब भी कोई मरीज जाता है तो उसे सीधे सरकारी डेंटल कॉलेज रैफर कर दिया जाता है। यानी स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में दांत निकालने का काम तो होता है, लेकिन दांत बचाने के इंतजाम नहीं हैं। मांगीलाल चूरिया अस्पताल में उपसंचालक डॉ. माधव हसानी ने निरीक्षण किया तब यह मामला सामने आया। यहां कुछ दिन पहले डेंटिस्ट की नियुक्ति कर दी गई, जबकि यहां दांतों संबंधी बीमारी का इलाज ही नहीं किया जाता। डेंटल चेयर सहित अन्य कोई उपकरण भी नहीं हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व शिविर का दिन था। डॉ. रुचि शेखावत भी नहीं मिलीं। पूछने पर बताया गया कि चाइल्ड केयर लीव पर हैं। शिविर डेंटिस्ट के भरोसे चल रहा था।सिर्फ एक अस्पताल में ही सुविधाजिला अस्पताल में तीन डेंटिस्ट पदस्थ हैं। हुकमचंद पॉलीक्लिनिक और पीसी सेठी अस्पताल में भी सीनियर डेंटिस्ट काम कर रहे हैं। यहां डेंटल चेयर भी है, लेकिन ज्यादा संसाधन नहीं हैं। हुकमचंद पॉलीक्लिनिक में तो बॉण्ड वाले डॉक्टरों को एक-एक साल के लिए भेजा जाता है। इतने अस्पतालों में डेंटिस्ट को पदस्थ किया गया है लेकिन ज्यादातर मरीजों को शासकीय डेंटल कॉलेज रैफर कर दिया जाता है। वहीं, मल्हारगंज पॉलिक्लिनिक के डॉ. पंकज नेहर ने बताया, यहां नियमित रूट कैनाल होता है। *जिला अस्पताल; दवा स्टोर प्रभारी को हटाया* जिला अस्पताल में दवाइयों को कचरे की तरह फेंकने के मामले में मंगलवार को एक्सपायरी दवा को डिस्पोज करने को लेकर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के सदस्यों को शोकॉज जारी किए गए। वहीं स्टोर प्रभारी नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष शर्मा से प्रभार वापस ले लिया है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएस सैत्या ने बताया कि दिसंबर में ही हमने जांच समिति बनाई थी लेकिन पांच महीनों तक उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इस पर तीनों को नोटिस जारी किया है। समिति में डॉ. एस. सिसौदिया, डॉ. मुकेश गुप्ता और जिला मलेरिया अधिकारी दौलत पटेल थे। वहीं सीएमएचओ ने बताया कि स्टोर प्रभारी फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश इंगले को निलंबित किया है। उधर, बताया जा रहा है कि हुकमचंद पॉलीक्लिनिक के इंचार्ज डॉ. आशुतोष शर्मा को चार महीने पहले ही स्टोर प्रभारी बनाया था। लाल अस्पताल में ही काम ज्यादा था तो उन्होंने स्टोर का चार्ज वापस लेने के लिए भी आवेदन दिया था। *यह है मामला* बीते दिनों एडीएम राजेंद्र रघुवंशी ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था। स्टोर की छत पर एक्सपायरी दवाओं का जखीरा पड़ा मिला था। कुछ दवाएं ऐसी भी थीं, जो एक्सपायर नहीं थीं।
