फर्जी वकील को हुई तीन साल की सजा, काला कोट पहनकर 18 साल से कर रहा था वकालत

By Abhishek Raghuvanshi
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आरोपित अधिवक्ता न होकर विगत वर्ष 1999 से काला कोट पहनकर न्यायालय, पुलिस, पक्षकारों को धोखा देकर उनसे अवैध राशि वसूल कर अवैधानिक सलाह देता है जिसे ऐसा करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था।
1999 से वर्ष 2017 तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वकालत की।
बार काउंसल आफ एमपी का फर्जी प्रमाण पत्र भी तैयार कर लिया।
बाद में उसे नोटिस जारी कर असल दस्तावेजों की मांग की गई थी।
भोपाल। राजधानी के पच्चीसवें अपर सत्र न्यायाधीश पहलाज सिंह कैमेथिया के न्यायालय काला कोट पहनकर अदालत में फर्जी रूप से प्रैक्टिस करने वाले आरोपित रविन्द्र कुमार गुप्ता को तीन वर्ष का कारावास और चार हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। शासन की ओर से लोक अभियोजक सतीश समैया ने पैरवी की।
बता दें कि अधिवक्ता राजेश व्यास ने थाना एमपी नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि रविन्द्र कुमार गुप्ता नामक व्यक्ति ने फर्जी म.प्र. राज्य अधिवक्ता परिषद का सनद प्रमाण पत्र तैयार कर उसमें कूटरचना कर उक्त दस्तावेज के आधार पर जिला अभिभाषक संघ, भोपाल में दिनांक 14 अगस्त 2013 को सदस्यता प्राप्त कर ली जिसका सदस्यता क्रमांक 4008 के रूप में अपना नाम दर्ज करवा लिया था।
विगत दिनांक 10 मई 2016 को बार काउंसल आफ एमपी का फर्जी प्रमाण पत्र भी तैयार कर लिया है जो क्रमांक 1629/1999 दिनांक 17 अगस्त 1999 बताया है वह वास्तविक रूप से प्रदीप कुमार शर्मा, अधिवक्ता उज्जैन के नाम से एडवोकेट सूची में पंजीकृत है। इसके बाद नोटिस जारी कर आरोपित से असल दस्तावेजों की मांग की गई जिस पर आरोपित ने 3 अप्रैल 2017 जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया वह भी फर्जी था।
जांच के बाद यह सिद्ध हो गया है कि आरोपित अधिवक्ता न होकर विगत वर्ष 1999 से काला कोट पहनकर न्यायालय, पुलिस, पक्षकारों को धोखा देकर उनसे अवैध राशि वसूल कर अवैधानिक सलाह देता है जिसे ऐसा करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। आरोपित के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 419, 420, 467, 468,471 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

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