इंदौर हाईकोर्ट ने नाबालिग रेप पीड़िताओं के मेडिकल परीक्षण कराने को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है। दरअसल, आजाद नगर थाना क्षेत्र की एक नाबालिग रेप पीड़िता गर्भवती हो गई। उसने गर्भपात के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई थी। उसे 24 सप्ताह से अधिक का गर्भ हो गया था।
कोर्ट ने इस पर चिंता जताई है कि कई बार पीड़िता की प्रेग्नेंसी की पुष्टि करने में देर हो जाती है, क्योंकि टेस्ट समय पर नहीं होता। ऐसे मामलों में जब तक कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मिलती है, तब तक गर्भ 20 हफ्ते से अधिक का हो जाता है। ऐसे में न तो डॉक्टरों के लिए और न ही पीड़िता के परिवार के लिए कोई फैसला लेना आसान होता है।
अधिवक्ता वरुण रावल के मुताबिक हाईकोर्ट ने यह आदेश नाबालिग दुष्कर्म पीड़िताओं के मामलों में गर्भवती होने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लिया है। डिवीजन बेंच इस तरह के मामलों में पूर्व में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर चुकी है।
कोर्ट ने पीड़िता के गर्भवती होने, टर्मिनेशन की सूचना मिलने पर तत्काल मेडिकल बोर्ड से परीक्षण करवाकर रजिस्ट्रार को सूचित करने के निर्देश दे रखे हैं ताकि पीड़िताओं के लिए समय पर निर्णय लिया जा सके।
हाई कोर्ट ने डीजीपी को दे रखे हैं विस्तृत निर्देश
हाईकोर्ट ने डीजीपी से कहा है यह कि वह प्रदेश के सभी जिलों के एसपी को इस बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करें, ताकि यह नियम पूरे राज्य में सख्ती से लागू हो सके। मेडिकल जांच के साथ ही प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाए, ताकि समय रहते पता चल सके और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
नाबालिग पीड़िता 24 सप्ताह से अधिक गर्भवती पाई जाती है, तो गर्भपात के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी, जैसा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट में प्रावधान है।
