
- 5000 कर्मचारी हटाए गए, कर्मचारियों ने जताया विरोध भोपाल। नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगमों में कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब सभी नगर निगमों में एआई-एमएल आधारित फेस आईडी सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक तकनीक से फर्जी वेतन भुगतानों पर अंकुश लगेगा, साथ ही कर्मचारियों की उपस्थिति, समयपालन और कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा।
इस व्यवस्था के तहत 12.06 बजे तक की रिपोर्ट में 5000 से अधिक कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाया गया है, जो लंबे समय से अनुपस्थित या फर्जी उपस्थिति दर्ज कर रहे थे। यह सिस्टम ई-एचआरएमएस के लिए आधार तैयार करेगा, जिससे भविष्य में मानव संसाधन प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनेगा।
करोड़ों की बचत की उम्मीद
नगरीय प्रशासन विभाग के एकयू वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक निगमों में फर्जी सैलरी भुगतान से करोड़ों का नुकसान हो रहा था। नई फेस आईडी तकनीक लागू होने के बाद यह धनराशि बचाई जा सकेगी। इसके अलावा, कर्मचारियों की उपस्थिति स्वत: दर्ज होने से समयपालन और कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
डीजल चोरी पर भी लगेगा अंकुश
विभाग के अनुसार, शहरी निकायों के तीन बड़े खर्चों में वेतन, डीजल और ठेका भुगतान शामिल हैं। इसमें डीजल चोरी एक गंभीर समस्या बन गई थी। अब एईबीएएस के लागू होने से डीजल चोरी पर भी नियंत्रण की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया कि डीजल चोरी शहरी निकायों का तीसरा सबसे बड़ा व्यय बन गई थी। एईबीएएस सिस्टम के लागू होने के बाद अब उसके प्रभाव दिखाई देने लगे हैं।
कुछ कर्मचारी जता रहे विरोध कुछ ने किया समर्थन
नगर निगम के चालक वर्ग ने इस सिस्टम का विरोध करते हुए हड़ताल की चेतावनी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि इस सिस्टम से कई तरह की समस्याएं हैं। कर्मचारियों ने शुक्रवार और शनिवार को विरोध स्वरूप काम बंद रखा। लोगों के घरों में वाहन नहीं पहुंचे जिसके कारण कचरा भी नहीं फेंका जा सका। वहीं कई सफाई कर्मचारियों सहित अन्य वर्गों ने इस नई व्यवस्था का स्वागत किया है और इसे पारदर्शिता की दिशा में सही कदम बताया है।
