देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के नालंदा परिसर में सोमवार को बीएड छात्रों ने हंगामा किया। छात्रों का कहना था कि उन्होंने बीएड की पढ़ाई में पूरे तीन साल दिए। अब तक लाखों रुपए फीस भर चुके हैं। तीन सेमेस्टर भी पास कर चुके हैं। फिर भी उन्हें अयोग्य क्यों माना जा रहा है? चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में उन्हें दोबारा बैठने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है? इस पर यूनिवर्सिटी की तरफ से तर्क िदया गया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन का नियम है कि दो वर्षीय बीएड कोर्स अधिकतम तीन साल में पूरा करना जरूरी है। इन सभी छात्रों को एडमिशन लिए तीन साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में अब ये छात्र बीएड कोर्स पूरा करने के लिए अयोग्य घोषित हो गए हैं।
इधर, छात्रों ने एक घंटे से ज्यादा समय तक हंगामा किया और कहा कि किसी को एक विषय में एटेकेटी है तो कोई छात्र चौथा सेमेस्टर भी पास कर चुका है, सिर्फ सेकंड सेमेस्टर में एक विषय में एटीकेटी होने के कारण फाइनल मार्कशीट अटक गई। ऐसे कई छात्र हैं, जिनके तीन सेमस्टर क्लीयर हैं, लेकिन किसी एक सेमेस्टर में एटीकेटी आई है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी का कहना है कि हमने छात्रों की मांग जनवरी माह में ही शासन व एनसीटीई को भेज दी थी, लेकिन अब तो कोई जवाब नहीं आया है। बगैर लिखित अनुमति के हम इन छात्रों की कोई भी नई परीक्षा आयोजित नहीं कर सकते हैं।
