Balaghat News: शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के करीबी दोस्त और साथी जवानों ने बताया कि आशीष सिर्फ एक अफसर नहीं बल्कि जांबाज और निडर योद्धा थे. वह नक्सल मोर्चों पर हमेशा सबसे आगे खड़े रहते थे. खतरा कितना बड़ा भी क्यों न हो, पीछे हटना उन्होंने कभी सीखा ही नहीं था.
बालाघाट. बात 19 नवंबर की है, जब तीन राज्यों के सुरक्षाबल संयुक्त रूप से एंटी नक्सल ऑपरेशन पर थे. जवानों को पुख्ता जानकारी थी कि दर्जनभर नक्सली छत्तीसगढ़ के कुर्रेझर थाना क्षेत्र के बोर तालाब से 6 किलोमीटर अंदर जंगल में इलाके में छिपे हैं. ऐसे में आधी रात को ही तीन टीमें तैयार होती हैं और नक्सलियों को घेरने की तैयारी करती हैं, जिसमें एक टीम में तीन से चार डीएसपी रैंक के अधिकारी थे. एक टीम को लीड कर रहे थे इंस्पेक्टर आशीष शर्मा. सभी जवान सर्चिंग करते हुए जंगल की ओर जाते हैं लेकिन नक्सली पुलिस को नुकसान पहुंचाने की नीयत से अचानक फायरिंग शुरू करते हैं.
टीम को लीड कर रहे इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को गोलियां लगती हैं, बावजूद इसके वह नक्सलियों से लोहा लेते रहे और उनपर जवाबी फायरिंग करते रहे. इसमें कुछ नक्सली घायल हो जाते हैं और अपना सामान छोड़ घने जंगल की ओर भाग जाते हैं. घायल अवस्था में भी अपने साथियों को कवर दे रहे इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को तीन गोलियां लगती हैं. फिर टीम उन्हें जंगल के बाहर लेकर आती है. अस्पताल के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, यहां तक कि एयरलिफ्ट की भी व्यवस्था की जाती है लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी. यह कहानी है उस शहीद इंस्पेक्टर की, जिसने बालाघाट के माथे पर लगे लाल आतंक के कलंक को मिटाने के लिए एक बार नहीं बल्कि कई बार जान की बाजी लगाई थी.
जवाबी कार्रवाई के बाद सामान छोड़ भागे नक्सली
मुठभेड़ के दौरान पुलिस की जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली पस्त हो गए और अपना सामान छोड़ घने जंगल की ओर भाग गए. नक्सलियों के डेरे से भारी मात्रा में दैनिक उपयोग का सामान मिला है. इसके अलावा नक्सल साहित्य और पिट्ठू बैग पुलिस पार्टी ने जब्त किया है.
