कोर्ट रूम में महिला पक्षकार और एक महिला आरक्षक के बीच जमकर हाथापाई, जज ने देखा तो दंग रह गए

By Abhishek Raghuvanshi
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शोरगुल होने पर न्यायालय में पदस्थ महिला आरक्षक ने महिला से कहा कि वह धीमी आवाज में बात करे। इस बात को लेकर महिला पक्षकार और महिला आरक्षक के बीच तू-तू, मैं-मैं हो गई जो कुछ ही देर में हाथापाई में बदल गई। महिला आरक्षक और महिला पक्षकार ने एक-दूसरे से जमकर झूमाझटकी की। वे दोनों लड़ते हुए कोर्ट रूम के भीतर पहुंच गए।
कुटुंब न्यायालय में पौन घंटे तक हुआ हंगामा।
पक्षकार और आरक्षक के बीच जमकर मारपीट।
न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ मामला।
इंदौर। बुधवार दोपहर कुटुंब न्यायालय में जमकर हंगामा हुआ। आपसी तलाक के मामले में सुनवाई पर पहुंची महिला पक्षकार का महिला आरक्षक से विवाद हो गया। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। दोनों लड़ते हुए कोर्ट रूम के भीतर पहुंच गए। न्यायाधीश ने कोर्ट रूम में दोनों को लड़ते देखा तो वे भी हतप्रभ रह गए। उनके हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। महिला आरक्षक ने संयोगितागंज पुलिस थाने पर मामले की शिकायत भी की है।
ऐसे हुआ यह हंगामा
हंगामा न्यायाधीश एससी सक्सेना के न्यायालय के बाहर हुआ।
मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने बताया कि एक दंपती ने सहमति से तलाक का प्रकरण दायर किया है।
इन्हीं दस्तावेजों में कुछ दस्तावेज कम थे। इसे लेकर महिला और उसके पति के बीच कोर्ट रूम के बाहर बहस चल रही थी।
शोरगुल होने पर न्यायालय में पदस्थ महिला आरक्षक ने महिला से कहा कि वह धीमी आवाज में बात करे।
इस बात को लेकर महिला पक्षकार और महिला आरक्षक के बीच तू-तू, मैं-मैं हो गई जो कुछ ही देर में हाथापाई में बदल गई।
महिला आरक्षक और महिला पक्षकार ने एक-दूसरे से जमकर झूमाझटकी की।
वे दोनों लड़ते हुए कोर्ट रूम के भीतर पहुंच गए।
दूसरे प्रकरणों की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश भी अचानक हुए इस घटनाक्रम से हतप्रभ रह गए।
पुलिसकर्मियों को बाहर किया
इस बीच महिला आरक्षक ने फोन कर घटना की जानकारी अन्य पुलिसकर्मियों को दी। कुछ ही देर में थाने का बल कुटुंब न्यायालय पहुंच गया। पुलिसकर्मी न्यायालय कक्ष के भीतर पहुंचे तो न्यायाधीश ने उन्हें बाहर कर दिया। लगभग पौन घंटे हंगामे के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
वकीलों, न्यायाधीशों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं
कुटुंब न्यायालय में रोजाना सैंकडों प्रकरण सुनवाई पर लगते हैं। सालों से यहां पुलिस चौकी और स्थाई पुलिस बल तैनाती की मांग हो रही है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पक्षकारों के बीच हाथापाई की घटनाएं होती रहती हैं। पक्षकार और वकीलों के बीच भी कई बार विवाद हो जाता है। कुटुंब न्यायालय में पुलिस चौकी स्थापित करने को लेकर हाई कोर्ट भी निर्देश दे चुकी है, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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