पार्षद कमलेश कालरा के घर तीन दर्जन से ज्यादा गुंडे भेजकर डराने, धमकाने, अभद्रता और मारपीट के मामले में एमआईसी के पूर्व सदस्य जीतू यादव (जाटव) को पुलिस 19 दिन बाद भी पकड़ नहीं सकी है। जीतू पर कार्रवाई तो दूर की बात, पुलिस उसे आरोपी तक नहीं बना सकी है।
कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने अब तक सिर्फ आधा दर्जन नोटिस और सूचना ही भेजी है। मामले में खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एसआईटी गठित करने के निर्देश देकर सभी आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर गिरफ्तार कर कार्रवाई के लिए कहा था।
पीड़ित पार्षद कमलेश कालरा का आरोप है कि घटना का मुख्य षड्यंत्रकारी जीतू यादव ही है। उसी के इशारे पर 40 से ज्यादा गुंडे घर में हमला करने घुसे थे। घटना के 4 वीडियो और 3 ऑडियो पुलिस को सबूत के तौर पर दे चुके हैं, लेकिन फिर भी जीतू को आरोपी नहीं बनाया है।
उधर, पुलिस का अभी भी यही कहना है कि उसके पास जीतू के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं। जांच में मदद के लिए जीतू को आधा दर्जन से ज्यादा सूचना व नोटिस भेजे हैं। उधर, जीतू के भाई अवि उर्फ अभिषेक की भूमिका आने के बाद भी एसआईटी उस तक नहीं पहुंच सकी है।
उदयपुर से भी खाली हाथ लौटी टीम
जीतू यादव और उसकी गैंग की तलाश में राजस्थान गई टीम लौट आई है। हालांकि एक टीम दूसरे राज्यों में भेजी गई है। अफसरों का कहना है कि तकनीकी जांच और सर्विलांस की मदद से कुछ बदमाशों की भूमिकाएं भी सामने आ रही हैं। तकनीकी जांच में मिले सबूतों को आधार बनाकर और भी आरोपियों को चिह्नित किया है।
एडिशनल डीसीपी जोन-4 आनंद यादव ने बताया कि पार्षद के घर हमले के मामले में जीतू को लेकर तकनीकी जांच का दायरा हमने बढ़ाया है। इस घटनाक्रम में जो लोग मौके पर मौजूद नहीं थे, फिर भी उनकी संलिप्तता थी, जांच में उससे जुड़े कई सबूत सामने आए हैं। पुख्ता सबूतों के बाद जीतू और उसके साथियों को आरोपी बनाया जा सकता है।
अब तक 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 9 के आपराधिक रिकॉर्ड हैं। 22 आरोपी चिह्नित हुए हैं, जो घटनास्थल पर मौजूद थे। जीतू के खास गुर्गे सोनू, अभिलाष और पिंटू सहित अन्य के नाम भी सामने आए हैं। वे फरार हैं। उनसे भी कुछ और खुलासे होंगे।
करीबी 4 गुर्गों को जेल भेजा, गुंडे ले जाने वाला भाई भी फरार
पुलिस जीतू के चार गुर्गों दीपक जेरिया, नितिन अड़ागले, देवेंद्र सरोज और धीरज हेड़ाऊ को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। हालांकि इन पर दंडात्मक कार्रवाई या बाउंड ओवर जैसी कार्रवाई नहीं की गई। न ही अब तक पकड़े गए आरोपियों में से किसी का जुलूस निकाला। सिर्फ चार आरोपियों का ही रिमांड लिया है। जीतू का भाई अभिषेक भी फरार है।
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भगोड़ा घोषित कर पॉक्सो में सीधे केस कर सकते हैं
पुलिस जीतू यादव को कई बार समन और नोटिस जारी कर चुकी है, ताकि वह अपने बयान दर्ज कराए। अगर वह नहीं आ रहा है तो ऐसे मामलों में पुलिस उसे भगोड़ा घोषित कर इनाम घोषित कर सकती है।
पॉक्सो एक्ट की धारा 13, 14 के तहत उस पर सीधे केस दर्ज हो सकता है, क्योंकि पार्षद के बेटे के फोटो और वीडियो सब जीतू को दिखाने के लिए ही उसके गुंडों ने बनाए थे।
ऑिडयो रिकॉर्डिंग में भी स्प्ष्ट है कि जब कालरा ने गुंडे वापस बुलाने के लिए कहा, तब सामने से जीतू यादव ने कहा कि हां, वापस बुला लेता हूं।
जितने अपराधों में उसके साथियों के खिलाफ एफआईआर हुई है, उन सब में 120 बी का आरोपी जीतू भी बनता है। इस धारा के मुताबिक भले ही कोई व्यक्ति अपराध करने में सक्रिय रूप से शामिल नहीं है, लेकिन साजिश का हिस्सा है।
बीएनएस की धारा 332 (बी) और 200 में भी जीतू पर अपराध बनता है। बीएनएस सेक्शन 332 (बी) के तहत अगर कोई किसी व्यक्ति के घर में घुसकर किसी ऐसे अपराध को अंजाम देता है, जिसकी सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है या कोई अन्य गंभीर अपराध करता है तो उस व्यक्ति पर इस धारा के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के 4 वीडियो और 3 ऑडियो भी पीड़ित पक्ष पुलिस को सबूत के तौर पर दे चुका है, उसके आधार पर भी कार्रवाई हो सकती है।
टीम जांच में जुटी है, पुख्ता साक्ष्य पर ही आरोपी बनाएंगे
जीतू यादव को आरोपी बनाने के लिए हमारी एसआईटी टीम पुख्ता साक्ष्य तलाश रही है। साक्ष्यों के सामने आते ही उसे आरोपी बनाएंगे। इसके लिए एक विशेष प्लानिंग पर काम किया जा रहा है, जिसका अभी खुलासा नहीं कर सकते। जल्द ही इसका परिणाम मिलेगा।
- आनंद यादव, एडिशनल डीसीपी जोन -4(एसआईटी इंचार्ज)
