इंदौर में छात्रा और इंजीनियर को रौंदने वाला ड्राइवर पहले भी ले चुका है दरोगा की जान

By Abhishek Raghuvanshi
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अंतिम चौराहा पर 12वीं की छात्रा मानसी श्रीवास और सॉफ्टवेयर इंजीनियर एकांश पांड्या को रौंदने वाला बस चालक आदतन निकला। वह नगर निगम के दरोगा की भी टक्कर मारकर जान ले चुका है। यह खुलासा मल्हारगंज पुलिस ने सीसीटीएनएस से जांच कर किया है। पुलिस अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन और बस प्रबंधक को नोटिस जारी कर रही है।
इंदौर। अंतिम चौराहा पर 12वीं की छात्रा मानसी श्रीवास और सॉफ्टवेयर इंजीनियर एकांश पांड्या को रौंदने वाला बस चालक आदतन निकला। वह नगर निगम के दरोगा की भी टक्कर मारकर जान ले चुका है। यह खुलासा मल्हारगंज पुलिस ने सीसीटीएनएस से जांच कर किया है। पुलिस अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन और बस प्रबंधक को नोटिस जारी कर रही है। मेडिकैप्स यूनिवर्सिटी की बस(एमपी 05वायजे 5064) से बुधवार दोपहर बड़ा गणपति क्षेत्र में हादसा हुआ था।
कॉलेज छात्र-छात्राओं से भरी बस ने स्कूटर चालक एकांश पांड्या और साइकिल सवार मानसी श्रीवास, खुशी करोसिया और सोहानी राठौर को टक्कर मार दी। इसमें मानसी और एकांश की मौके पर ही मौत हो गई। बुधवार रात पुलिस ने चालक जीवनसिंह को किशनगंज क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। देर रात हुई पूछताछ में जीवन ने बहाना बनाया और कहा चक्कर आने के कारण हादसा हुआ है। पुलिस ने अचेत अवस्था में भागने का पूछा तो जीवन चुप हो गया।
बस प्रबंधक की लापरवाही सामने आई
टीआइ देवेंद्रसिंह कुशवाह के मुताबिक जीवनसिंह का आपराधिक रिकॉर्ड मिला है। उसने पूर्व में भी एरोड्रम थाना क्षेत्र में नगर निगम के दरोगा को टक्कर मार कर जान ली है। उसके खिलाफ दर्ज अपराध का ब्योरा केस डायरी में शामिल किया जा रहा है। पुलिस परिचालक महेश की तलाश कर रही है। वह भी हादसे के बाद जीवनसिंह के साथ फरार हो गया था। टीआइ के मुताबिक बस प्रबंधक की लापरवाही सामने आई है। उसको तलब किया जा रहा है।
मौतों का जिम्मेदार कौन?
कॉलेज प्रबंधन या ड्राइवर कॉलेज के पहले ही दिन हुई इस घटना ने कईं सवाल खड़े कर दिए है। दो लोगों की मौत का असल जिम्मेदार आखिर कौन है। टक्कर मारने वाला चालक तो गिरफ्तार हो गया पर प्रबंधन अभी भी नादान बना बैठा है। पुलिस के मुताबिक जीवनसिंह रेस लगा रहा था। उसने जाते वक्त भी लापरवाही पूर्वक बस चलाई और टक्कर मारते मारते बचा। लौटने के दौरान उसने महूनाका क्षेत्र में डिवाइडर पर बस का पहिया चढ़ा दिया। इसके बाद अंतिम चौराहा पर दूसरी बस को ओवरटेक करने के चक्कर में जो भी सामने आया उसको उड़ाता गया।
अकाउंटेंट है मानसी के पिता अजय श्रीवास
इस हादसे ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की लापरावाही भी उजागर कर दी है। बस ओवरलोड थी और इसकी जानकारी प्रबंधन को भी थी। बेटी को पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाना चाहते थे पिता बस हादसे में मृत 12वीं की छात्रा मानसी श्रीवास और एकांश पांड्या के शव का गुरुवार को पोस्टमार्टम करवाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचे स्वजन बदहवास हो गए। मानसी के पिता अजय श्रीवास अकाउंटेंट है। उनका सात साल का बेटा है। अजय के मुताबिक उनकी बेटी स्कूल में टॉपर थी।
चालक की लापरवाही ने खुशियां छीन ली
क्लाथ मार्केट कन्या विद्यालय में उसको पुरस्कार मिलता था। बेटी पढ़ कर इंजीनियर बनना चाहती थी। चालक की लापरवाही ने उनकी खुशियां छीन ली। हादसे की खबर लगते ही सबसे पहले मानसी की मां कृष्णा अस्पताल पहुंची थी। जैसे ही मौत की खबर मिली बेहोश हो गई। एकांश भी घर में सबसे बढ़ा था। वह दवा लेने के लिए घर से निकला था। सौ मीटर दूर पहुंचा था कि बस ने चपेट में ले लिया।

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