नगर निगम के सहायक उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल को भारी भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। ईओडब्ल्यू की छापेमारी में आय से कई गुना अधिक संपत्ति पाई गई। निगमायुक्त ने इसे घोर कदाचार मानते हुए पाटिल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं।
ईओडब्ल्यू छापे में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा।
चेतन पाटिल को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाया गया।
निगम की छवि धूमिल करने पर कार्रवाई की गई।
इंदौर। भ्रष्टाचार में लिप्त करोड़ों के आसामी नगर निगम के सहायक उद्यान अधिकारी चेतन पाटिल की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने बुधवार को इसके आदेश जारी कर दिए। आदेश तत्काल प्रभावशील भी हो गया है।
आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने 17 जून 2025 मंगलवार को पाटिल के गुलमोहर ग्रीन स्थित आवास और नगर निगम मुख्यालय स्थित कार्यालय पर छापा मार कार्रवाई की थी। जांच में यह बात सामने आई कि 21 वर्ष की नौकरी में पाटिल को वेतन के रूप में तो 15 लाख रुपये ही मिले, लेकिन उसके पास संपत्ति इससे कई गुना ज्यादा है।
ईओडब्ल्यू ने पाटिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) एवं सहपठित 13(1)बी, 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर इसकी सूचना निगमायुक्त को दी थी। चेतन नगर निगम में विनियमित कर्मी था। निगमायुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा है कि पाटिल के इस कृत्य से निगम की छबि धूमिल हुई है। उसका यह कृत्य, भ्रष्टाचार घोर कदाचार की श्रेणी में आता है। उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं।
मस्टरकर्मी के रूप में हुआ था भर्ती
चेतन वर्ष 2024 में नगर निगम में मस्टरकर्मी के रूप में भर्ती हुआ था। वह कई जोन कार्यालयों पर सहायक यंत्री के रूप में पदस्थ रहा। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में घुसपैठ बनाकर वह उद्यान अधिकारी के पद तक पहुंच गया था। उस पर अप्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान पौधे खरीदी में गड़बड़ी करने सहित आर्थिक अनियमितता के कई आरोप हैं।
