शहर के यातायात को बिगाड़ने में गंगवाल बस स्टैंड, सरवटे और जिंसी से निकलने वाली बसों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। ये बसें शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम लगा रही हैं। राजनीतिक प्रभाव और दादागीरी के चलते ये न तो कलेक्टर और न ही पुलिस कमिश्नर का आदेश मानते हैं।
कुछ महीनों पहले तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने विशेष आदेश निकालकर कहा था कि गंगवाल बस स्टैंड से निकली बसें चौराहों पर खड़ी न रहें, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब पिछले दिनों पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के आदेश के बाद दो दिन ग्वालटोली पुलिस ने कार्रवाई की और अब हालात फिर वैसे ही हो गए हैं।
500 से ज्यादा बसें
150 बसें चलती हैं गंगवाल बस स्टैंड से… इसमें बेटमा, धार, पीथमपुर, रतलाम, गुजरात रूट की बसें आती और जाती हैं।
350 बसों के फेरे रोज लगते हैं सरवटे बस स्टैंड से… यहां से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, शिर्डी, बड़वानी, बड़वाह, मंडलेश्वर, सनावद सहित अन्य रूट की बसें चल रही हैं।
15 बसें चल रही हैं जिंसी बस स्टैंड से… यहां से हातोद, देपालपुर रूट की बसें चल रही हैं।
स्टैंड से चौराहे तक 30 मिनट में पहुंची
धार रोड स्थित गंगवाल बस स्टैंड पर दोपहर में ओम साईं राम ट्रैवल्स की धार-बेटमा-इंदौर रूट की बस सवारी बैठाने के लिए स्टैंड पर लगी। आरटीओ परमिट के हिसाब से 20 मिनट तक बस स्टैंड पर सवारियां बैठाती रही। इसके बाद बस स्टैंड की बगल वाली गली से निकली। फिर लाबरिया भेरू चौराहे की तरफ बढ़ी।
यह चौराहा स्टैंड से 100 मीटर दूर है। फिर भी इस बस ने यहां तक पहुंचने में आधा घंटा लगा दिया। ड्राइवर ने बीच सड़क पर एक लेन घेरकर बस को खड़ा कर दिया। पीछे दूसरे वाहन चालक परेशान होते रहे। इस दौरान चौराहे पर तीन पुलिसकर्मी भी ड्यूटी कर रहे थे। ड्राइवर का मन हुआ तब उसने बस को आगे बढ़ाया।
सरवटे बस स्टैंड : उज्जैन और खंडवा रूट की बसों की मनमानी
सरवटे बस स्टैंड पर तो बसों को सवारियां बैठाने के लिए पर्याप्त जगह और 20 मिनट मिलते हैं। इसके बाद भी बसें स्टैंड के गेट पर खड़ी रहती हैं। स्टैंड के ठीक सामने वाली दूसरी लेन में भी बसें एक के पीछे एक खड़ी हो गई। फिर धीरे-धीरे पटेल ब्रिज के नीचे पहुंचीं। इसके बाद रेलवे स्टेशन पहुंचते-पहुंचते आधा घंटा लगा दिया। इस दौरान उनके पीछे चलने वाले वाहन रेंगते रहे।
