अडानी से जुड़ी रिपोर्टिंग पर लगी रोक को अस्थायी तौर पर हटाने का आदेश!

By Abhishek Raghuvanshi
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दिल्ली अदालत ने परंजय गुहा ठाकुरता पर लगा “गैग ऑर्डर” हटाया, निचली अदालत को ताज़ा सुनवाई का निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली की रोहिणी कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज सुनील चौधरी ने वरिष्ठ पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता की याचिका पर सुनवाई करते हुए अडानी से जुड़ी रिपोर्टिंग पर लगी रोक को अस्थायी तौर पर हटा दिया है। जज ने कहा कि जब तक निचली अदालत यानी सीनियर सिविल जज नया आदेश पारित नहीं करते, तब तक यह रोक लागू नहीं होगी।

इससे पहले 6 सितंबर को रोहिणी कोर्ट के सीनियर सिविल जज अनुज कुमार सिंह ने एकतरफा आदेश जारी करते हुए अडानी समूह से संबंधित रिपोर्टों और वीडियोज़ को हटाने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कई पत्रकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर यूट्यूब वीडियो डिलीट करने के लिए कहा था। जिन प्रमुख चैनलों और पत्रकारों को नोटिस मिला उनमें न्यूज़लॉन्ड्री, अभिसार शर्मा, ध्रुव राठी, रवीश कुमार ऑफिशियल, द देशभक्त, दीपक शर्मा, प्रज्ञा का पन्ना, अजीत अंजुम, HW News English और परंजय ऑनलाइन शामिल थे।
गैग ऑर्डर” दरअसल अदालत का वह आदेश होता है, जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था को किसी खास विषय पर बोलने, लिखने या प्रकाशित करने से रोका जाता है। अंग्रेज़ी का ‘गैग’ शब्द मुँह बंद कराने या चुप कराने के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए ‘गैग ऑर्डर’ का सीधा हिंदी अर्थ है “चुप कराने वाला आदेश” या “मौन आदेश”।

इस मसले पर 24 सितंबर को जज सुनील चौधरी ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से कहा गया था कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो वे 6 सितंबर के आदेश को लेकर कोई निरोधात्मक कदम नहीं उठाएँगे। लेकिन ठाकुरता की ओर से पेश वकील अपर गुप्ता ने तर्क दिया कि इससे पहले से डिलीट कराई गई रिपोर्टों को दोबारा प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि अदालत को इस पर स्पष्ट आदेश देना चाहिए।
ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले 18 सितंबर को ही एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज आशीष अग्रवाल ने चार पत्रकारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि पत्रकारों का पक्ष सुने बिना न्यूज़ आर्टिकल और वीडियो डिलीट करने का आदेश उचित नहीं था। इस दौरान यूट्यूब पत्रकारों की ओर से वकील वृंदा ग्रोवर और नकुल गांधी ने भी दलील दी थी कि जून 2024 के एक आर्टिकल को लेकर जल्दबाज़ी में एकतरफा आदेश लिया गया, जबकि दो-तीन दिन की नोटिस भी दी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि अडानी जैसी बड़ी कंपनी यह दावा कर रही है कि इन खबरों से वह संकट में है, लेकिन तथ्य यह है कि आर्टिकल किसी व्यक्ति पर केंद्रित था, कंपनी पर नहीं।

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अब जिला अदालत ने यह साफ़ कर दिया है कि निचली अदालत इस मामले की नई सुनवाई करेगी और तब तक गुहा ठाकुरता पर लगाया गया “गैग ऑर्डर” प्रभावी नहीं रहेगा। अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी, जहाँ यह तय होगा कि आगे पत्रकारिता की स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा के बीच अदालत किस तरह संतुलन साधती है।

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