इंदौर में ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान के तहत बिना हेलमेट के वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीने में हेलमेट नहीं पहनने वाले 71 दो पहिया वाहन चालकों की मौत हो गई और 1011 को सिर में गंभीर चोटें आई हैं।
एक साल में 12 लाख 27 हजार 322 के बने चालान।
शहर के 43 चौराहों पर 385 कैमरे बना रहे चालान।
अब 23 अन्य चौराहों पर कैमरे लगाने की है योजना।
इंदौर। इंदौर शहर में बुधवार को ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान के छठे दिन भी पेट्रोल पंपों पर सख्ती नजर आई। पंपों के बाहर बिना हेलमेट वाले वाहन चालकों की कतारें नजर आईं। ये चालक दूसरों से हेलमेट मांगकर पेट्रोल भरवाते नजर आए। यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीने में हेलमेट नहीं पहनने वाले 71 दो पहिया वाहन चालकों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई और 1011 को सिर में गंभीर चोटें आई हैं। शहर के 43 चौराहों पर 385 कैमरों से एक साल में 12 लाख 27 हजार 322 वाहनों के चालान बने। वहीं, एक लाख 40 हजार 913 वाहन चालकों ने चालान की राशि जमा की। तेज रफ्तार वाहन चलाने से सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की ज्यादा मौत हो रही है। इससे पहले भी 10 साल में दो बार हेलमेट को लेकर पूर्व कलेक्टरों ने आदेश दिए थे, लेकिन दोनों बार अभियान कुछ ही समय में ठंडा पड़ गया।
इसकी वजह यह है कि ऐसे आदेश का पूरी तरह पालन करवाने के लिए न तो ठोस रणनीति है और न ही सिस्टम। अभी कलेक्टर आशीष सिंह के एक अगस्त को नो हेलमेट-नो पेट्रोल के आदेश के बाद जरूर सख्ती चल रही है। इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसमें उल्लंघन करने पर पेट्रोल पंप संचालक को एक साल की जेल या पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है।
पांच साल में हेलमेट नहीं लगाने पर बने चालान
वर्ष 2020 में 27,887
वर्ष 2021 में 23,327
वर्ष 2022 में 39,063
वर्ष 2023 में 46,761
वर्ष 2024 में 41,290
वर्ष 2025 में 39,299
पिछले छह महीने में 136 की मौत
नगरीय यातायात इंदौर के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में पैदल चलने वाले 44 की मौत और 263 घायल हुए। साइकिल चलाने वाले पांच की मौत और 27 घायल हुए। पिछले छह महीने में हेलमेट नहीं पहनने वाले 71 दो पहिया वाहन चालकों की मौत हुई जबकि 1011 को सिर में गंभीर चोटें आई हैं। आटो रिक्शा से 27 घायल हुए।
कार, टैक्सी, वैन, एलएमवी से आठ की मौत एवं 88 घायल हुए। ट्रक व लारी से दो की मौत एवं आठ घायल तथा बस से एक की मौत एवं 13 घायल हुए हैं। ई-रिक्शा से चार की मौत एवं 48 घायल हुए। कुछ मिलाकर 1879 व्यक्तियों के साथ सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 136 की मौत और 1500 व्यक्ति घायल हुए।
दुर्घटनाओं में युवाओं की ज्यादा मौतें
शहर में अब स्मार्ट सिटी के तहत इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) कैमरों द्वारा 2022 से चालान बनाए जा रहे हैं। इसके पहले आईएलबीडी कैमरों द्वारा चालान बनाए जा रहे थे। आगामी समय में 23 चौराहों पर कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। वाहन चालक अपने और अपने परिवार की चिंता नहीं कर रहे हैं। तेज रफ्तार वाहन चलाने से सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की ज्यादा मौत हो रही है। युवाओं को सबसे ज्यादा हेलमेट पहनने की जरूरत है, क्योंकि वे वाहन लापरवाही से चलाते हैं। – संतोष कौल, एएसपी, यातायात
युवाओं को हेलमेट पहनने की ज्यादा जरूरत
पिछले दो वर्षों में सबसे ज्यादा ऐसे युवा दो पहिया वाहन चालकों की दुर्घटनाओं में मौतें एवं गंभीर घायल हुए हैं, जिन्होंने वाहन चलाते समय हेलमेट नहीं पहना था। अक्सर देखा गया है कि वे स्वयं की सुरक्षा एवं यातायात के नियमों के प्रति बहुत ज्यादा लापरवाही बरत रहे हैं। युवाओं को तेज रफ्तार वाहन चलाते समय हेलमेट का विशेष रूप से उपयोग करना चाहिए। युवाओं का भविष्य बहुत लंबा है। – हिंदूसिंह मूवेल, एसीपी, यातायात
