हिंदुस्तान तो भगवान भरोसे ही चल रहा है और नीली छतरी के नीचे सबको ही रहना है सिर्फ़ इतना करना है कि यह छतरी नीली ही बनी रहे

By Abhishek Raghuvanshi
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केमिस्ट्री के विद्यार्थी होने के कारण मैंने माननीय श्री विजयवर्गीय जी द्वारा बुलायी गई मीटिंग में यही कहा था कि वेस्ट की अच्छी प्रयोगशाला में जाँच की जावे और परिणाम आने तक जलाने की प्रक्रिया स्थगित रखी जावे । वेस्ट की जाँच होने पर यह भी पता चलेगा कि जलाने से कौनसी गैसें निकलेगी ? यह भी हो सकता है कि जलाना ही नहीं पड़े और इस वेस्ट को उपयोगी पदार्थ में बदला जा सके । यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में ज़हरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस बनती थी जिससे अमेरिका और जर्मनी बहू उपयोगी polyurethane पोलीयूरीथेन पॉलीमर बनाते थे जो हवाईजहाज से लेकर गद्दे तक में काम आता था ।इस कार्य में मैं पूरा सहयोग देने को तैयार हूँ । वेस्ट जलाना भी हो तो बंद चैम्बर में जलाया जावे जिससे नीली छतरी बनी रहे ।शवों को विद्युत चैम्बर में इसीलिये जलाया जाता है ।
बीमारियाँ तो सभी जानलेवा और दर्द से भरी होती हैं । यदि गंदे नाले में उगी हुई सब्ज़ियाँ और फल खा लेते हैं तो भी कैंसर हो जाता है ।अतः डरने डराने की प्रक्रिया छोड़कर सबको गहन चिंतन करना चाहिए ।
शासन ने वेस्ट जलाने की प्रक्रिया को रोक कर अच्छा कदम उठाया है जिसके लिये मीडिया और इंदौर पीथमपुर की जनता को बधाई । .. प्रोफेसर डॉ शंकर लाल गर्ग

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