राजनीति का अखाड़ा बना इंदौर नगर निगम, विवाद के बाद संपत्ति सर्वे अभियान पर रोक

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर नगर निगम इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बन गया है। जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों के बीच सामंजस्य की डोर पूरी तरह टूट चुकी है। प्रशासन और चुने हुए प्रतिनिधि पक्ष–विपक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं। ऐसे में विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
इंदौर। इंदौर नगर निगम इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बन गया है। जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों के बीच सामंजस्य की डोर पूरी तरह टूट चुकी है। प्रशासन और चुने हुए प्रतिनिधि पक्ष–विपक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं। ऐसे में विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
विवाद उस समय गहराया जब निगम द्वारा वार्ड 74 में शुरू किए गए संपत्ति सर्वेक्षण अभियान पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी झड़प हुई और एक–दूसरे पर एफआईआर दर्ज कराने की नौबत आ गई। विवाद बढ़ने के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने रविवार को रेज़िडेंसी कोठी पर निगम अधिकारियों, महापौर परिषद के सदस्यों और पुलिस अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट कहा कि इससे इंदौर और सरकार दोनों की छवि धूमिल हो रही है। बैठक के बाद फिलहाल अभियान को रोक दिया गया।
विवाद कैसे भड़का
वार्ड 74 में निगमायुक्त के निर्देश पर 24 अक्टूबर से तीन दिवसीय संपत्ति सर्वेक्षण अभियान चलाया गया था। इसमें सभी 22 जोनों के निगम अधिकारी–कर्मचारियों को घर–घर जाकर सर्वे करना था। शनिवार दोपहर पार्षद सुनीता हार्डिया के पति सुनील हार्डिया का सर्वे टीम से विवाद हो गया। उनका आरोप था कि टीम बिना सूचना के लोगों के घरों में घुस रही है। उन्होंने टीम के खिलाफ एफआईआर कराई। देर शाम निगम अधिकारी ने भी दूसरे पक्ष पर एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद महापौर परिषद सदस्य बबलू शर्मा और कई पार्षद थाने पहुंचे और निगम अधिकारियों के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज कराई।
मंत्री ने दी सख्त समझाइश
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा मौजूद रहे। मंत्री विजयवर्गीय ने दोनों पक्षों को समझाइश दी कि किसी तरह का असमंजस नहीं होना चाहिए।
वर्ष 2000 का किस्सा
इसी तरह का अभियान वर्ष 2000 में भी चला था, लेकिन जनता के विरोध के चलते दो दिन में ही बंद करना पड़ा था। उस समय कर्मचारी मौके पर ही कर वसूलकर रसीद जारी करते थे।
नेताओं की प्रतिक्रिया
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “संपत्ति का मूल्यांकन जरूरी है, लेकिन इसे सही तरीके और सूचना देकर होना चाहिए। बिना बताए मकानों की नपती करना अराजकता है, जिसे मैं महापौर रहते बर्दाश्त नहीं करूंगा।” निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने कहा, “हम योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे। राजस्व संग्रहण शहर के विकास के लिए जरूरी है और जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां सुधार करेंगे।”

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