बीआरटीएस में कार्यरत कंपनी पर गंभीर संदेह महापौर ने दिए तत्काल जांच के निर्देश

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने गुरुवार को मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) में फेयर-कलेक्शन और टिकटिंग के कार्य के लिए नियोजित कंपनी “ASIS इलेक्ट्रॉनिक्स” पर गंभीर संदेह सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कंपनी का सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध उस कंपनी से हो सकता है जिसने पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई किए थे।

जांच के आदेश और संभावित कार्रवाई

महापौर भार्गव ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि यदि यह कंपनी उस संदिग्ध कंपनी की सिस्टर कंसर्न है या कोई भी वित्तीय या कारोबारी संबंध पाया जाता है, तो तत्काल प्रभाव से जांच की जाए।जांच के उपरांत यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कंपनी का अनुबंध समाप्त किया जाए।

कंपनी की पृष्ठभूमि और कार्य विवरण की जांच

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महापौर ने बताया कि कंपनी की प्रक्रिया 2016 में प्रारंभ हुई थी तथा कार्य 2019 से शुरू हुआ।यह कंपनी बीआरटीएस में टिकटिंग व फेयर-कलेक्शन का कार्य कर रही है।

अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यह जांचा जाए कि

कंपनी को वर्क ऑर्डर कब जारी हुआ?फील्ड में कार्य कब शुरू हुआ?चार्ज प्रणाली (फिक्स्ड या परफॉर्मेंस आधारित) क्या रही?

*बीआरटीएस का निकट भविष्य और ठेके का अंत

महापौर ने यह भी कहा कि“चूंकि बीआरटीएस परियोजना आगामी समय में समाप्त होने जा रही है, अतः इससे संबंधित सभी अनुबंधों की समीक्षा कर समाप्ति की दिशा में कार्य किया जाएगा।”

राष्ट्रीय भावना और जनभावनाओं का सम्मान

महापौर भार्गव ने यह भी कहा कि देश में देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर, कई लोगों ने ऐसे विदेशी उत्पादों और सेवाओं का उपयोग करने से स्वयं इनकार किया है जिनका संबंध पाकिस्तान जैसे राष्ट्र से है जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।उन्होंने कहा कि यदि किसी कंपनी की तकनीक, कार्य प्रणाली या व्यापार से देश को आर्थिक या सामाजिक नुकसान हो सकता है, तो उसकी भी पूर्ण जांच कराई जाएगी।नगर पालिक निगम इंदौर यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी ऐसी कंपनी को शहर में कार्य न करने दिया जाए जिसका किसी भी रूप में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से संबंध हो। यह कदम सुरक्षा, पारदर्शिता और जनभावनाओं के संरक्षण के लिए आवश्यक है।

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