बड़ी खबर भाजपा पार्षद कमलेश कालरा जाती प्रमाणपत्र मामले में 3 मार्च तक निर्णय ले लेगी समिति उच्च न्यायालय से की गुहार

By Abhishek Raghuvanshi
4 Min Read

4फरवरी को प्रमुख सचिव पिछड़ा और अल्पसंख्यक विभाग अजीत केसरी, सौरभ कुमार सुमन पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक विभाग आयुक्त, घनश्याम धनगर एस डी एम जूनी इंदौर ,वार्ड 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा समेत 1 अन्य को उच्च न्यायालय की अवमानना का मामले में 5000 का जमानती वारंट जारी किया थे जिसके दो दिन बाद सभी ने न्यायालय से माफी मांगते हुए 1 सप्ताह में निर्णय लेने की गुहार लगाते हुए वारंट वापिस लेने हेतु अर्जी लगाई थी जिस पर न्यायालय ने 17 फरवरी तक की मोहलत दी थी

वार्ड 65 से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे सुनील यादव की याचिका पर जारी हुआ वारंट था याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता मनीष यादव, करण बैरागी ने तर्क रखे कि न्यायालय के 6 माह में पार्षद कालरा के जाती प्रमाण पत्र की जांच के आदेश होने के बाद भी जानबूझकर विलंब किया जा रहा है, पार्षद पर फर्जी जाती प्रमाण पत्र से पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड से चुनाव लड़ के जितने कि शिकायत कर रखी है, जिस पर छान बिन समिति लंबे समय से जांच कर रही है,सारे तथ्य आ जाने के बाद भी निर्णय नहीं कर रही माननीय न्यायालय ने फरवरी 2024 में समिति को आवश्यक रूप से 6 माह में जांच पूर्ण करने हेतु आदेशित किया था, किन्तू उसके बावजूद न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए,निर्णय नहीं किया गया ,

मामले को जानबूझ कर सत्ता पक्ष के दबाव में आकर निर्णय नहीं किया जो न्यायालय के आदेश की सीधी अवमानना है, पिछली सुनवाई में नोटिस जारी हुए थे नोटिस प्राप्त होने के बावजूद कोई उपस्थित नहीं हुआ अधिवक्ता मनीष यादव, करण बैरागी ने इसे सीधे न्यायालय की अवमानना बताया था जिस पर कोर्ट ने उनके तर्को से सहमत होकर न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा जी की कोर्ट ने प्रमुख सचिव अजित केसरी, कमिश्नर पिछड़ा वर्ग आयोग सौरभ कुमार,सचिव डॉ निलेश देसाई छानबीन समिति के घनश्याम धनगर,सफलता दुबे समेत भाजपा पार्षद कमलेश कालरा को न्यायलय की अवमानना करने पर 5000 के जमानती वारंट से तलब किया था आज फिर सभी प्रत्यर्थी की और से न्यायालय से मोहलत मांगते हुए तर्क रखे कि कलेक्टर के द्वारा दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने की वजह से समिति निर्णय नहीं ले पाई हे 13 को समिति ने मीटिंग भी करी थी कलेक्टर को अंतिम 2 दिन का समय दिया गया हे अगर दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए गए तो समिति अंतिम निर्णय पारित कर लेगी 10 दिन को मोहलत दी जाए जिस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष यादव ने कड़ी आपत्ति लेते। हुए तर्क रखे कलेक्टर के द्वारा विगत तीन वर्षों से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए गए हे इनके द्वारा न्यायालय को इस बात के लिए आश्वास्त किया गया था कि 1 सप्ताह में निर्णय लेलेंगे हमारा वारंट वापिस किया जाए बावजूद इसके पालन नहीं किया जिस पर न्यायालय ने 3 तारिक तक समिति को निर्णय लेने हेतु आदेशित किया अगली सुनवाई 3 मार्च 2025 के लिए नियत की हैं

Exit mobile version