आयोजक राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के सहयोग से “न्यायालयों में प्रकरणों की बढोत्तरी और वंचना (पश्चिम क्षेत्र)” विषय पर केंद्रित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन आज शनिवार से इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में प्रारंभ हुआ, जो भारत की न्यायिक प्रणाली की गंभीर चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आयोजन राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के सहयोग से किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के माननीय न्यायाधीशों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय थे। जिन्होंने अपने उद्बोधन में न्यायपालिका के समक्ष विद्यमान दोहरी चुनौतियों, प्रकरणों की बढ़ती संख्या और वंचित वर्गों की न्याय से दूरी पर गहन विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने व्यक्त किया कि न्यायपालिका की भूमिका केवल विधि की व्याख्या तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समावेशी न्याय को सुनिश्चित करने की व्यापक जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के महत्व, न्याय में देरी के सामाजिक प्रभाव, सोशल मीडिया द्वारा न्यायिक धारणा पर प्रभाव और संवैधानिक नैतिकता पर आधारित संस्थागत सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका की दृढ़ता और निष्पक्षता की सराहना करते हुए न्यायाधीशों से निर्भीकता और निष्पक्षता के साथ निर्णय लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका भारत के नैतिक और संवैधानिक ताने-बाने को गढ़ने में अहम भूमिका निभाती है और सिद्धांतों पर आधारित निर्णय लेना सामाजिक एवं विधिक परिपक्वता के लिए आवश्यक है।
न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा मुख्य न्यायाधीश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बढ़ते लंबित मामलों को एक चुनौती बताया। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए तकनीक, नीतिगत सुधार और संस्थागत नवाचार को सम्मिलित करते हुए बहुपक्षीय रणनीति अपनाने पर बल दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला एवं विशेष रूप से प्रकरणों के प्रबंधन, आंकड़ों के विश्लेषण और समयबद्ध निर्णय के साथ ही मध्यस्थता केंद्रों को सशक्त करने और पुराने अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त करने की आवश्यकता जताई।
न्यायमूर्ति श्री अनिरुद्ध बोस पूर्व न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय एवं निदेशक राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी ने उद्घाटन सत्र में अकादमी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे अकादमी अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढाल रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को कानूनी अध्ययन, नैतिकता, प्रक्रियात्मक दक्षता और नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा-आधारित निर्णय क्षमता से सुसज्जित करना आज की आवश्यकता है।
धन्यवाद ज्ञापन न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया प्रशासनिक न्यायाधीश मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ द्वारा प्रकट किया गया। उन्होंने सभी माननीय अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजनकर्ताओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन समारोह में कई अन्य न्यायिक विशिष्टजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को शोभायमान किया गया। इनमें माननीय न्यायमूर्ति श्री अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक, न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अन्य सभी माननीय न्यायाधीश उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मुम्बई, राजस्थान और गुजरात उच्च न्यायालयों से भी माननीय न्यायाधीश एवं चारों राज्यों से आए न्यायिक अधिकारी सम्मिलित हुए, जिससे अंतर-राज्यीय संवाद और ज्ञान-विनिमय को एक समृद्ध मंच प्राप्त हुआ।
सम्मेलन में प्रमुख अधिकारियों में श्री धर्मिंदर सिंह (रजिस्ट्रार जनरल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय), श्री कृष्णमूर्ति मिश्रा (निदेशक मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी) तथा श्री विजय चंद्रा (रजिस्ट्रार राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी) तथा श्री अजय श्रीवास्तव (प्रधान जिला न्यायाधीश) की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
यह सम्मेलन आगामी सत्रों में मामलों के प्रबंधन, न्यायिक नवाचार तथा न्याय तक पहुँच और लंबित मामलों में कमी के लिए क्षेत्रीय रणनीतियों पर केंद्रित चर्चाओं के साथ जारी रहेगा। यह संगोष्ठी न्यायिक प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए न्याय, समावेशन और दक्षता को मूल केंद्र में रखकर सामूहिक संकल्प को अभिव्यक्त करती है।
