नवजीवन पवार की कार्यशैली पर बढ़ते गुस्से के बाद कलेक्टर का बड़ा फैसला, पवार समेत चार ADM में बांटा काम

By Abhishek Raghuvanshi
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 इंदौर। इंदौर कलेक्ट्रेट में एडीएम नवजीवन पवार के अव्यवहारिक कार्यशैली को लेकर लंबे समय से जमा हो रहा गुस्सा आखिरकार प्रशासनिक निर्णय में बदल गया। अधिकारी और कर्मचारी महीनों से परेशान थे, लेकिन किसी को भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। लल्लूराम डॉट कॉम (Lalluram.com) ने अधिकारियों और कर्मचारियों के दर्द को प्रमुखता से उजागर किया। उनकी परेशानियां, शिकायतें और पवार के रवैये से पैदा हो रहा तनाव, सबकुछ तथ्यपूर्ण तरीके से सामने लाया गया। यही वह रिपोर्ट थी जिसने स्थिति को जिला प्रशासन के शीर्ष स्तर तक पहुंचाया।

खबर सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर शिवम वर्मा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्वाचन का काम अब नवजीवन पवार के अकेले हाथ में न रखते हुए चार ADM में बांट दिया। इस फैसले का सीधा मतलब है कि अब निर्वाचन कार्य किसी एक अधिकारी की मनमानी के भरोसे नहीं रहेगा। कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों का कहना था कि पवार का व्यवहार “हम ही आका हैं” वाली शैली में बदल चुका था। कर्मचारियों पर लगातार दबाव, उलझाने वाले निर्देश, अव्यावहारिक समय सीमाएं और फाइलों को लेकर अनावश्यक कड़ाई, इन सबने माहौल खराब कर दिया था। बैठकें भी अकसर तनाव में बदल जाती थीं और काम प्रभावित होता था।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने कर्मचारियों का मनोबल गिरने से रोकने और निर्वाचन कार्य को पटरी पर लाने के लिए तुरंत फैसला लेते हुए पूरे काम को चार ADM की संयुक्त टीम में बांटा। अब कार्य का भार भी संतुलित रहेगा और किसी एक अधिकारी की कार्यशैली का दारोमदार नहीं रहेगा। प्रशासनिक हलकों में यह कदम साफ संदेश देता है कि इंदौर में काम दबाव से नहीं, टीमवर्क से चलता है।

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