इंस्टाग्राम के वायरल ‘कार्बाइड गन’ ट्रेंड ने मप्र से बिहार तक छीन लीं बच्चों की आंखों की रोशनी

By Abhishek Raghuvanshi
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पूरे देश में ‘कार्बाइड गन’ का खतरनाक नया ट्रेंड मासूमों की आंखों की रोशनी छीन रहा है. इसे ‘देसी पटाखा गन’ या ‘जुगाड़ी बम’ नाम दिया जा रहा है, वह बच्चों के लिए खतरनाक खिलौना साबित हो रहा है.

अस्पतालों के मुताबीक अब तक शहर के 125 से ज्यादा हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें ज्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं। कुछ को कार्निया ट्रांसप्लांट की नौबत भी बनी है।

पूरे देश में ‘कार्बाइड गन’ का खतरनाक नया ट्रेंड मासूमों की आंखों की रोशनी छीन रहा है. इसे ‘देसी पटाखा गन’ या ‘जुगाड़ी बम’ नाम दिया जा रहा है, वह बच्चों के लिए खतरनाक खिलौना साबित हो रहा है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में इस अवैध और खतरनाक जुगाड़ के कारण बच्चों की आँखों में गंभीर चोटें आई हैं.

मध्य प्रदेश में तीन दिनों में 122 से ज़्यादा बच्चे घायल

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कार्बाइड गन के इस्तेमान से आंखों में गंभीर चोट के मामलों में अचानक खतरनाक वृद्धि देखी गई है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ तीन दिनों में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश में 122 से ज़्यादा बच्चे गंभीर आंख की चोटों के साथ अस्पतालों में भर्ती हुए हैं. विदिशा जिले में खुलेआम बिक रही जुगाड़ की कार्बाइड गन ने तो 14 मासूमों की आंखों की रोशनी छीन ली.

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में अकेले 26 से अधिक केस दर्ज हुए हैं. 17 वर्षीय नेहा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जुगाड़ की कार्बाइड गन फटने से उनकी एक आंख पूरी तरह झुलस गई. एक और पीड़ित राज विश्वकर्मा ने कहा कि “मैंने सोशल मीडिया पर देखकर देसी पटाखा गन बनाया था, तभी धमाका हो गया… मेरी आंख चली गई.” 

अन्य राज्यों में भी कहर

उत्तर प्रदेश के जालौन में कैल्शियम कार्बाइड गन से एक नाबालिग गंभीर रूप से घायल हो गया. किशोर की आंख में चोट आई, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है. वहीं, दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, बिहार के पटना में पटाखों के विकल्प के तौर पर कार्बाइड गन का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे 50 से ज़्यादा लोगों की आंखों की रोशनी जा चुकी है.

कैसे बनता है यह ‘जानलेवा का खिलौना’?

हमीदिया अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा और अन्य नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ‘जुगाड़ी बम’ बच्चों द्वारा माचिस की तीलियों और बारूद को मिलाकर प्लास्टिक या टीन के ट्यूब में भरकर बनाया जा रहा है. धमाके के दौरान, तेज़ छर्रे और धातु के कण सीधे आंखों पर वार करते हैं. कई मामलों में, आंख की पुतली फटने तक की स्थिति बन गई, जिसके कारण तुरंत सर्जरी करनी पड़ी है.

सोशल मीडिया का खतरनाक ‘चैलेंज’ जिम्मेदार

इस खतरनाक ट्रेंड के पीछे मुख्य वजह इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब की चैलेंज वीडियो को माना जा रहा है. ‘पटाखा गन चैलेंज’ जैसे नाम से वायरल हो रहे वीडियो देखकर बच्चे घर में ही गैरेज जैसी प्रयोगशाला बना रहे हैं और खुद को व दूसरों को खतरे में डाल रहे हैं.

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