14 नवम्बर तक चलाया जायेगा विशेष अभियान
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने स्क्रीनिंग शिविरों को लेकर बैठक ली
इंदौर जिले में दिव्यांग बच्चों की (0 से 18 वर्ष) शीघ्र पहचान, उपचार एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्क्रीनिंग शिविरों के आयोजन को लेकर आज यहां कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर श्री शिवम वर्मा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सिद्धार्थ जैन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में बताया गया कि इंदौर जिले के 18 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों की शीघ्र पहचान, रेफरल, उपचार तथा दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदाय करने हेतु स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया जायेगा। इससे दिव्यांगजनों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। स्क्रीनिंग शिविरों के आयोजन का यह अभियान 14 नवम्बर 2025 तक चलाया जायेगा। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 7-8 पंचायतों के क्लस्टर पर दिव्यांगता स्क्रीनिंग शिविर के आयोजन किये जाएंगे। शिविर में अधिनस्थ आँगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत बच्चों में से संभावित दिव्यांग बच्चों की पूर्व पहचान की जायेगी। शिविर में शालेय पूर्व बच्चों तथा अप्रवेशी शालात्यागी बच्चों का आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा क्लस्टर स्तर पर एकत्रीकरण किया जायेगा। शिविर में चिन्हांकित दिव्यांग बच्चों को निश्चित दिवस पर जिला बोर्ड में समुचित चिकित्सकीय परीक्षण एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी कर उसे पोर्टल पर दर्ज किया जायेगा। बैठक में बताया गया कि इस कार्य में आयुष विभाग, पंचायत विभाग एवं नगरीय विकास विभाग के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। साथ ही 0 से लेकर 18 वर्ष आयु के सभी दिव्यांगजन बच्चों को स्पर्श पोर्टल पर दर्ज किया जायेगा। बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुष विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि इन स्क्रीनिंग शिविरों का लाभ सभी चिन्हांकित दिव्यांगजनों को मिले। कोई भी दिव्यांगजन वंचित नहीं रहे। अधिकारी दिव्यांग बच्चों के साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें। दिव्यांगजनों को चिन्हांकित करने में लापरवाही नहीं बरतें। दिव्यांग बच्चों को निकट शिविर तक ले जाने की सम्पूर्ण व्यवस्था करें। शिविर स्थल पर दिव्यांगजनों के खाने-पीने एवं बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित करें।
