मुख्यालय ने बजाई कुर्सियों की घंटी!
सूत्र भोपाल मुख्यालय से आया सख्त फरमान — “दो साल से एक ही थाने में टिके थाना प्रभारी, अब निकलो और नई हवा खाओ!”इंदौर समेत पूरे प्रदेश में उन थाना प्रभारियों की लिस्ट तैयार हो रही है जो दो साल से एक ही थाने में ऐसे जम गए जैसे सरकारी कुर्सी उनकी पैतृक संपत्ति हो।लसूडिया, विजयनगर, तेजाजी नगर, राजेंद्र नगर राऊ, गांधी नगर, एमजी रोड और बाणगंगा एरोड्रम भंवर कुवा चंदन नगर जूनी इंदौर — इन थानों के टीआई अब अपने तबादले की खबर पर ऐसे तिलमिला रहे हैं जैसे कोई बच्चा खिलौना छिन जाने पर रो पड़े।कई तो रात-से मंत्रियों को फोन लगा रहे हैं — “सर, बस ये कुर्सी बचा लीजिए, बाकी जनता का क्या है… वो तो कल भी पिटी थी, आज भी पिटेगी!”सूत्रों के मुताबिक, लगातार हो रही हत्याएं, बढ़ते अपराध और “कागजों में सुलझे केस” की पोल खुलने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने तल्खी दिखा दी है। कमिश्नर सिंह तो शुरू से ही चाहते थे कि हर थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में ईमानदारी से, जनता के प्रति जवाबदेही के साथ काम करे — लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि उन्हें खुद मैदान में उतरकर सच्ची कार्रवाई करनी पड़ रही है।कुछ थाना प्रभारी ऐसे हैं जो “राजनैतिक छतरी” तानकर दो साल से कुर्सी पर जमे हैं — और अब जब तबादले की आंधी आई तो वही लोग सबसे ज्यादा ‘हवा में उड़’ रहे हैं।एसीपी और डीसीपी को भी चेतावनी दी गई है — “सिर्फ चाय पीने और मीटिंग करने से काम नहीं चलेगा, अपराध रोकने की जवाबदारी लो!”कई थाने ऐसे हैं जहाँ घटनाएँ घट गईं, पर रिपोर्ट आज तक लिखी नहीं गई; कई थाने ऐसे हैं जहाँ अपराधी सोने से पहले खुद टीआई को फोन कर कहते हैं — “भैया, आज भी केस मत लिखना, कल आकर सुलझा लेंगे।”अब सवाल यह है — क्या इन तबादलों से अपराध पर लगाम लगेगी या सिर्फ कुर्सियों की अदला-बदली में जनता फिर ठगी जाएगी?क्योंकि जनता तो बस यही देख रही है — “थाना वही, चेहरे नए, और खेल पुराना — इंदौर में सिस्टम नहीं बदला, बस नामपट्टियाँ बदलती हैं!”
