स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बच्चों के लिए बनाया गया ‘जिज्ञासा रथ’ इन दिनों नेहरू पार्क में धूल खा रहा है। यह वही बस थी जिसे खेल-खेल में बच्चों को सीखने, सोचने और समझने की गतिविधियों से जोड़ने के लिए चलित लर्निंग सेंटर के रूप में तैयार किया था। अब यह अवॉर्ड विजेता प्रोजेक्ट नेहरू पार्क में लंबे समय से पड़ा है। इसके टायरों में हवा नहीं है। रंग उखड़ चुका है। अंदर की शैक्षणिक सामग्री गायब हो चुकी है।
साल 2023 में इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट ‘नर्चरिंग नेबरहुड’ पहल का हिस्सा था। इसके तहत 10 साल पुरानी बस को जिज्ञासा रथ के रूप में बदला था। इसका मकसद था कि बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर देना और माता-पिता को बाल विकास से जुड़ी समझ देना और बच्चों के विकास के लिए शहर के सार्वजनिक स्थानों को उनके अनुकूल बनाना। इस बस में गतिविधियों, शैक्षणिक खेलों, कहानियों और रचनात्मक कार्यशालाएं होनी थीं। इसके जरिए विभिन्न क्षेत्रों में जाकर बच्चों तक शिक्षा और मनोरंजन दोनों पहुंचाने की योजना थी। शुरुआत में इसे काफी सराहना मिली और इस प्रोजेक्ट की वजह से स्मार्ट सिटी कंपनी ने दिल्ली में 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी जीता, लेकिन कुछ ही महीनों में इसकी रफ्तार थम गई। लंबे समय से बस का संचालन नहीं हुआ। धीरे-धीरे इसका रखरखाव भी बंद हो गया। इंदौर उन चुनिंदा शहरों में शामिल था, जिसे इस पहल के तहत चार पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का मौका मिला था।
इन्हीं में से एक था जिज्ञासा रथ। 2023 में दिल्ली में हुए नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज में बेंगलुरू स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी ने पहला स्थान प्राप्त किया था, जबकि जबलपुर दूसरे स्थान रहा था। इस कार्यक्रम में इंदौर को प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए सराहना मिली थी। इसे भी अवॉर्ड मिला था।
नवाचार में लापरवाही : नर्चरिंग नेबरहुड प्रोजेक्ट का ‘जिज्ञासा रथ’ रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल
मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं… मुझे जिज्ञासा रथ की ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। वैसे इस तरह के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी शहर की संस्थाओं और एनजीओ को सौंपी जाती है। अब वे इसका संचालन क्यों नहीं कर रहे हैं, यह पता करना होगा। – अर्थ जैन, सीईओ इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी
