गुजरात हाई कोर्ट ने अब वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों के मुकदमों में भी कोर्ट फ़ीस को लेकर फ़ैसला दिया है।

By Abhishek Raghuvanshi
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*कांग्रेस के रोज़ नए-नए खुलासे होते हैं। अब पता चला है कि वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों के मुकदमों में आज तक कोर्ट फ़ीस नहीं ली जाती थी, जबकि दूसरी तरफ़ मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च आदि अन्य धर्मों की संपत्तियों के दावों में बाकायदा कोर्ट फ़ीस जमा की जाती थी। तभी मुकदमा चलता था।*_

■ _*गुजरात हाई कोर्ट ने वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े विवादों में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि अब वक़्फ़ बोर्ड को भी अन्य धार्मिक ट्रस्टों की तरह तय कोर्ट फ़ीस भरनी होगी। अदालत ने दो टूक कहा कि कानून की नज़र में कोई भी संस्था प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकती।*_

■ _*अब तक स्थिति यह थी कि मंदिर, गुरुद्वारा और चर्च जैसे धार्मिक ट्रस्टों को संपत्ति विवादों में कोर्ट फ़ीस देनी पड़ती थी, जबकि वक़्फ़ बोर्ड को पुराने कानूनों में स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण छूट मिलती रही। हाई कोर्ट ने इस छूट को समाप्त करते हुए समान नियम लागू करने का आदेश दिया है, जो छोटी दरगाहों से लेकर बड़ी मस्जिदों के प्रबंधन तक समान रूप से प्रभावी होगा।*_

■ _*कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उस तंत्र को चुनौती देता है, जिसे लंबे समय तक राजनीतिक तुष्टिकरण के तहत बनाए रखा गया। अदालत ने अपने निर्णय के ज़रिये यह संदेश दिया है कि सेक्युलर व्यवस्था का मतलब विशेष रियायत नहीं, बल्कि सभी के लिए समान कानून है।*_

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■ *यह फैसला न केवल वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने वाला है, बल्कि उन नीतियों पर भी सवाल उठाता है, जिनके तहत वर्षों तक एक वर्ग को अलग क़ानूनी लाभ मिलता रहा।*

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