
इंदौर में साइबर अपराधियों ने फर्जी सिमकार्ड का उपयोग करके ऑनलाइन धोखाधड़ी की। आरोपितों ने ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर सिमकार्ड बेचे और उनकी डुप्लीकेट सिमकार्ड का उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया। ठगी का धंधा लाओस से चल रहा था। पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
डिजिटल अरेस्ट केस में पुलिस ने तीन आरोपितों को सिवनी से पकड़ा।
महिला शेयर कारोबारी से 1.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल थे।
आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वे किस तरह सिम ठगों तक पहुंचाते थे।
इंदौर। शेयर कारोबारी वंदना गुप्ता के साथ हुई एक करोड़ 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी के तार विदेश से जुड़े हैं। साइबर अपराधियों ने उन्हें लाओस से कॉल लगाया था। पुलिस ने मामले में तीन आरोपितों को पकड़ा है जो फर्जी सिमकार्ड जारी करवाकर थाइलैंड के रास्ते लाओस भिजवाने में शामिल थे।
एक महिला भी इंस्टाग्राम के माध्यम से एजेंट से जुड़ी थी। आरोपित गांवों में कैंप लगाकर सिमकार्ड बेचते थे और उसकी एक डुप्लीकेट सिम अपने पास रखकर उन्हें विदेश भेज देते थे। इन्हीं फर्जी सिमकार्ड का उपयोग ठगी में करते थे।
महिला को किया था डिजिटल अरेस्ट
एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के मुताबिक बिचौली मर्दाना निवासी 59 वर्षीय वंदना को दो महीने पूर्व डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया था। शेयर कारोबार से जुड़ी वंदना को जेट एयरलाइंस के संस्थापक नरेश गोयल केस से जुड़े मनी लांड्रिंग केस में शामिल होना बताया और सीबीआई, दिल्ली क्राइम ब्रांच, ईडी, आरबीआइ अफसर बनकर तीन दिन तक पूछताछ की।
