आज मैं बाबा साहेब की जन्मस्थली महूँ आया हूं।
वह बाबा साहेब जिनके कारण भारत का गणतंत्र दुनिया में पहली बार जाना पहचाना गया।
बाबा साहेब से जुड़े पंच तीर्थ में महू एक प्रमुख तीर्थ है…
आज के दिन हमने संविधान निर्माता को यहाँ आकर प्रणाम किया है…
यह अलग बात है कि कुछ लोग यहां पर्यटन के रूप में आते हैं…
यह तो तीर्थ स्थल है और तीर्थ स्थल की महत्ता तिथियो से होती है , यदि आना ही है तो तिथियो पर आना चाहिए लेकिन बड़े दुर्भाग्य से कहना पड़ रहा है कि लोग इवेंट के हिसाब से आते हैं , ना कि कमिटमेंट के हिसाब से…
बाबा साहब को सदैव कष्ट आए तो एक विशेष पार्टी से और उनके नेताओं के कारण….
वह अपनी जमीन खोकर अब यहां पर्यटन के रूप में आ रहे है…
हम तो प्रार्थना करते हैं कि बाबा साहेब उनको सद्बुद्धि प्रदान करे…
उम्मीद करता हूं कि वो लोग बाबासाहेब के साथ किए गए अन्याय को भी स्मरण करेंगे , माफी माँगेंगे…
आज के दिन मैं अपनी सरकार की ओर से बाबा साहेब को नमन करने आया हूं , आज हम संविधान के प्रति दिए गए उनके योगदान को स्मरण कर रहे हैं….
बाबा साहब ने धारा 370 का भी उस समय विरोध किया था , जिसके कारण हजारों निर्दोषों की हत्याएं हुई….
लोकतंत्र के इस पावन मंदिर में जनता भगवान है , जनता सब देख रही है , सबको पहचान रही है….” – डॉ.मोहन यादव
