इंदौर में नरीमन प्वाइंट बिल्डिंग में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, फ्लैट 309 से चला था देह व्यापार का धंधा!

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर। शहर के पॉश इलाके नरीमन प्वाइंट बिल्डिंग, छोटा बांगड़ा में देह व्यापार का काला कारोबार चल रहा था — कल दोपहर सूचना मिलते ही जब टीम फ्लैट नंबर 309 पर पहुंची तो अंदर का नज़ारा देखकर सभी दंग रह गए।
दरवाजा खुलते ही दो युवक और चार युवतियां वहां मौजूद मिलीं। पुलिस को देखकर दो युवतियां गेट खोलकर मौके से फरार हो गईं, जबकि एक युवक एक युवती के साथ नग्न अवस्था में आपत्तिजनक हालत में मिला।
जांच में सामने आया कि यह पूरा रैकेट सपना राजपूत और रजनी नामक दो महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा था। दोनों न केवल लड़कियों को बुलाती थीं बल्कि शहर के कई इलाकों में ग्राहकों से संपर्क कर सप्लाई तक का काम करती थीं।
पुलिस ने मौके से दोनों के मोबाइल जब्त किए, जिनमें सैकड़ों युवतियों की तस्वीरें, चैटिंग और ग्राहक सूची मिली है। मोबाइल की जांच में कई बड़े नामों के नंबर भी सामने आ रहे हैं, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई है।
पूछताछ में पीथमपुर से लाई गई एक युवती ने बताया कि मुझे सपना ₹1000 देती थी, एक बार ग्राहक के साथ भेजकर। अगर ज्यादा ग्राहक होता तो ₹1500 मिलते थे।”
सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि सपना राजपूत ने अपना मोबाइल नंबर इंदौर के कई सुलभ शौचालयों की दीवारों पर लिख रखा था।
पुलिस ने पूरे प्रकरण की सूचना थाना एरोड्रम को दी। इसके बाद सभी आरोपितों और पकड़ी गई युवतियों को कार्रवाई के लिए थाना लाया गया।
घटना की सूचना पर मौके पर श्री राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता भी पहुंचे। मानसिंह राजावत, अभिजीत सिंह बुंदेला, मयंक और मोहित सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर रैकेट चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
करीब दो घंटे तक चली कार्रवाई में पुलिस ने कई अहम सुराग हाथ लगाए हैं। माना जा रहा है कि यह रैकेट न केवल इंदौर बल्कि आसपास के जिलों में भी फैला हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, सपना राजपूत और रजनी पिछले कुछ महीनों से लगातार फ्लैट बदल-बदल कर यह धंधा चला रही थीं। फ्लैट 309 उनका नया अड्डा बना हुआ था, जहां से रोजाना नए ग्राहक आते-जाते थे। पुलिस अब मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड के ज़रिए इस रैकेट के नेटवर्क की तह तक जाने की तैयारी में है।

बड़ा सवाल….
इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी में ऐसे रैकेट आखिर कैसे पनप रहे हैं?, सुलभ शौचालयों से लेकर सोशल मीडिया तक पर खुलेआम नंबर और ऑफर क्या प्रशासन की निगरानी व्यवस्था केवल कागज़ों में रह गई है?

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