इंदौर में ई-रिक्शा को लेकर बड़ा फैसला, मनमानी पर लगेगी रोक; तय रूट पर ही चल सकेंगे

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर शहर को 10 सेक्टरों में बांटकर हर ई-रिक्शा के लिए सीमित क्षेत्र, तय मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इससे जहां ट्रैफिक सुधरेगा, वहीं यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा भी बढ़ेगी। मार्ग तय नहीं होने से कई स्थानों पर ई-रिक्शा की भीड़ लग जाती है, सवारियों को लेकर विवाद होते हैं और जाम की स्थिति बनती है।
शहर में सीमित क्षेत्र से बाहर नहीं चल सकेगा कोई ई-रिक्शा
ट्रैफिक सुधरेगा, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा भी बढ़ेगी
राजवाड़ा, भंवरकुआं, पाटनीपुरा जैस इलाकों में ज्यादा दबाव
इंदौर। इंदौर शहर की सड़कों पर कहीं भी रुककर यातायात जाम करने वाले ई-रिक्शा अब मनमर्जी से नहीं चल पाएंगे। लगातार बढ़ती शिकायतों और बिगड़ते ट्रैफिक हालात को देखते हुए यातायात विभाग ने ई-रिक्शा व्यवस्था को पटरी पर लाने की तैयारी कर ली है। शहर को 10 सेक्टरों में बांटकर हर ई-रिक्शा के लिए सीमित क्षेत्र, तय मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इससे जहां ट्रैफिक सुधरेगा, वहीं यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा भी बढ़ेगी।
ट्रैफिक प्रभारी डीसीपी आनंद कलादगी के अनुसार, प्रत्येक सेक्टर के लिए एक निश्चित रंग तय किया जाएगा, जो ई-रिक्शा के आगे कांच और पीछे के हिस्से पर लगाए जाने वाले लोगो में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही थीं। अध्ययन में सामने आया कि मार्ग तय नहीं होने से कई स्थानों पर ई-रिक्शा की भीड़ लग जाती है, सवारियों को लेकर विवाद होते हैं और जाम की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।
एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार कौल के मुताबिक, बुधवार को पलासिया स्थित ट्रैफिक कार्यालय में ई-रिक्शा चालकों के साथ बैठक हुई, जिसमें चालकों ने एक-दो दिन का समय मांगा है। इसके बाद दोबारा बैठक कर व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के प्रमुख प्रस्ताव शहर को 10 सेक्टर में बांटा जाएगा।
हर सेक्टर का एक तय रंग होगा।
ई-रिक्शा पर रूट नंबर, रिक्शा नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर लिखना अनिवार्य।
आगे कांच और पीछे हिस्से में रंगीन लोगो लगेगा।
ई-रिक्शा सिर्फ अपने तय सेक्टर में ही सवारी बैठा और उतार सकेगा।
दूसरे सेक्टर में प्रवेश पर चालान किया जाएगा।
रोजगार भी, अनुशासन भी
एसीपी हिंदूसिंह मुवेल के अनुसार, सेक्टर इस तरह तय किए जाएंगे कि हर क्षेत्र में मुख्य मार्ग और व्यावसायिक इलाके शामिल हों। इससे ई-रिक्शा चालकों को पर्याप्त सवारी मिले और उनके रोजगार पर असर न पड़े। प्रत्येक सेक्टर में वहां के स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
यात्रियों को क्या फायदा
ई-रिक्शा चालकों की पहचान आसान होगी।
छेड़छाड़, अभद्रता, सामान भूलने या चोरी की स्थिति में चालक तक पहुंच संभव।
किसी हादसे की स्थिति में रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध होगा।
एक ही जगह बड़ी संख्या में ई-रिक्शा जमा नहीं होंगे।
चुनौतियां भी आएंगी
एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर जाने के लिए ई-रिक्शा बदलना पड़ेगा।
जैसे अन्नपूर्णा से विजयनगर जाने पर दो ई-रिक्शा लेने पड़ सकते हैं।
इससे किराए को लेकर असहमति की स्थिति बन सकती है।

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