दीपावली की रात जब पूरा शहर दीपों से जगमगा रहा था, उसी समय इंदौर नगर निगम की टीमें यह सुनिश्चित करने में लगी थीं कि अगली सुबह शहर फिर से उतना ही स्वच्छ और सुंदर दिखाई दे जितना त्योहार से पहले था। यही वह समर्पण है जिसने इंदौर को लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता की राजधानी बनाए रखा है।
दीपावली की अगली सुबह तड़के 3 बजे, जब अधिकांश घरों में दीपक की लौ मंद पड़ने लगी थी, इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव स्वयं सड़कों पर निकले। उनके साथ निगम के सभी अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, अभय राजनगांवकर, मनोज पाठक और नरेंद्र नाथ पांडेय ने भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया। यह दृश्य इंदौर की उस कार्यसंस्कृति का प्रतीक था जो “साफ़-सुथरा इंदौर, अपना गौरव” की भावना को जीती है।
राजवाड़ा से लेकर रीगल, मरीमाता, विप रोड, जेल रोड, पलासिया, बड़ा गणपति और जंजीरावाला चौराहा,हर जगह निगम का अमला अपने काम में जुटा रहा। सफाई मित्रों ने आतिशबाजी से जमा हुए कचरे को हटाने के लिए मशीनों, डंपरों और ट्रॉलियों की मदद से निरंतर काम किया। शहर में कहीं भी देर तक कचरा या अव्यवस्था दिखाई नहीं दी, यह अपने आप में एक मिसाल है।
इस पूरे अभियान में खास बात यह रही कि सफाई का यह सिलसिला बिना किसी दिखावे या प्रचार के चला। तड़के 3 बजे से ही टीमों ने मोर्चा संभाल लिया था, ताकि जब शहरवासी सुबह नींद से जागें, तो उन्हें वही इंदौर दिखाई दे
इंदौर नगर निगम ने यह साबित किया है कि सफाई केवल व्यवस्था का नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा है। दीपावली की रात की रोशनी के बाद सफाई की यह चमक दिखाती है कि इंदौर की असली पहचान उसकी सक्रियता, तत्परता और जिम्मेदारी में है।
यही वजह है कि हर त्योहार के बाद भी इंदौर की सड़कों पर सिर्फ दीपों की नहीं, व्यवस्था की भी रोशनी झिलमिलाती है।
कुल मिलाकर त्योहार की खुशियों के बाद जो शहर अपनी सड़कों को फिर से मुस्कुराना सिखा दे, वही इंदौर कहलाने का हकदार है। नगर निगम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिर्फ सफाई नहीं, यह इंदौर की पहचान है और उसका अभिमान भी है।
