आकाश वापस लेने उतरे निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव — इंदौर के नए ‘स्काई गार्ड’

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर में अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ आज से कड़ा और बड़ा अभियान शुरू हो गया है। यह शुरुआत शहर को यह एहसास दिलाने के लिए काफ़ी है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति कठोर हो जाती है, तो वर्षों पुरानी अव्यवस्थाएँ भी एक दिन में ढहने लगती हैं। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव इस लड़ाई के केंद्र में खड़े हैं..एक ऐसे अधिकारी के रूप में, जिन्होंने शहर के आसमान को भी प्रशासनिक जिम्मेदारी के दायरे में शामिल कर लिया है। पहला ही दिन साबित कर गया कि यह कोई दिखावटी शुरुआत नहीं है। अवैध यूनिपोल, लॉलीपॉप और जेंट्री हटाने के साथ ही निगम ने असली सवाल वहीं से पकड़ा जहाँ अव्यवस्था की जड़ें थीं..इन ढाँचों को लगाया किसने? किस आधार पर? किस अनुमति पर? आज से जिन भी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के नाम पर अवैध होर्डिंग मिले हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यह कदम बेहद दूरगामी असर वाला है, क्योंकि पहली बार फलेक्‍स हटाने तक सीमित रहने के बजाय उस व्यापारी, उस एजेंसी और उस पूरे नेटवर्क तक जवाबदेही तय की जा रही है, जिसने शहर के आसमान पर कब्ज़ा जमाने का दुस्साहस किया। उनसे यह जानकारी लेनी होगी कि बोर्ड किसने लगाया, कैसे लगाया और किस अनुमति के भरोसे लगाया।
यह वही कड़ी है जो वर्षों तक कमजोर रही और इसी कमजोरी ने इंदौर की स्काईलाइन को बेतरतीब विज्ञापनों के हवाले कर दिया। आयुक्त दिलीप कुमार यादव की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सभी ज़ोनों को वैध स्थलों की सूची सौंप दी है..ताकि यह बिल्कुल स्पष्ट रहे कि कौन-सा बोर्ड मान्य है और कौन-सा सीधे-सीधे अतिक्रमण। यह पारदर्शिता बताती है कि इस बार चोट केवल ढाँचों पर नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया पर हो रही है।
साथ ही, आयुक्त ने शहरवासियों को भी इस लड़ाई का सहभागी बनाया है। उन्होंने अपील की है कि कोई भी नागरिक 311 एप पर अवैध होर्डिंग की शिकायत भेजे। जल्द ही इसके लिए एक समर्पित टोल-फ़्री नंबर भी जारी किया जा सकता है।
इंदौर ने स्वच्छता में देश को रास्ता दिखाया था,और अब दृश्य प्रदूषण के खिलाफ यह नई लड़ाई उसी परंपरा का अगला अध्याय बनती दिखाई दे रही है। पहले दिन की कार्रवाई ने साफ़ कर दिया है कि यह शहर को उसकी खोई हुई नीलिमा वापस लौटाने का संकल्प है। और इस संकल्प का चेहरा—इस लड़ाई के ‘स्काई गार्ड’, निस्संदेह आयुक्त दिलीप कुमार यादव ही हैं।
यदि यह दृढ़ता कायम रही, तो इंदौर का आसमान बहुत जल्द फिर से मुक्त, नीला और बिल्कुल इंदौर जैसा दिखाई देगा।

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