भारतीय की हत्या करने वाले अमेरिकी को सजा-ए-मौत:डेथ इंजेक्शन लगाया गया; आरोपी ने 22 साल पहले युवक को गोली मारी थी

By Abhishek Raghuvanshi
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भारतीय युवक की हत्या करने वाले दोषी की यह तस्वीर ओक्लाहोमा पुलिस ने जारी की। - Dainik Bhaskar

भारतीय युवक की हत्या करने वाले दोषी की यह तस्वीर ओक्लाहोमा पुलिस ने जारी की।

अमेरिका के ओक्लाहोमा में एक भारतीय युवक की हत्या करने वाले दोषी को सजा-ए-मौत दी गई। उसे जहरीला इंजेक्शन लगाया गया।

अमेरिकी मीडिया ABC न्यूज के मुताबिक, 41 साल के दोषी माइकल ड्वेन स्मिथ ने 2002 में 24 साल के शरथ पुल्लुरु की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 22 साल बाद 4 अप्रैल 2024 को उसे सजा दी गई।

माइकल ने फरवरी 2002 में एक अन्य अमेरिकी महिला जेनेट मूर की भी हत्या की थी। उस वक्त माइकल की उम्र 19 साल थी।

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तस्वीर शरथ पुल्लुरु (बाएं) और जेनेट मूर (दाएं) की है।

गलती से भारतीय को मार दिया था
BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, माइकल ड्रग गैंग चलाता था। उसने गलती से भारतीय युवक शरथ पुल्लुरु को मार दिया था। शरथ एक दुकान में क्लर्क था। इसी दुकान के अन्य क्लर्क ने माइकल के क्रिमिनल गैंग के खिलाफ लोकल मीडिया को खबर दी थी। माइकल इसी क्लर्क के मारने दुकान में घुसा था, लेकिन वो क्लर्क को पहचान नहीं पाया और उसने शरथ को गोली मार दी थी।

जेनेट के बेटे को मारना चाहता था माइकल
फरवरी 2002 में माइकल ने जेनेट नाम की अमेरिकी महिला की हत्या की थी। वो उसके बेटे को मारने आया था। माइकल को शक था कि जेनेट का बेटा पुलिस का खबरी था और उसके गैंग के बारे में पुलिस को जानकारी देता था। जब बेटा घर पर नहीं मिला तो माइकल ने जेनेट को मार दिया।

तस्वीर लीथल डेथ इंजेक्शन टेबल की है। इस पर दोषी को लिटाकर उसके हाथ-पैर और शरीर को बांधा जाता है फिर इंजेक्शन लगाया जाता है।

हत्या करते समय नशे में था दोषी
अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, एक सुनवाई के दौरान माइकल के वकील ने कहा था कि हत्या करते समय वो नशे में था। उसे याद भी नहीं था कि उसने किसी को गोली मारी है। अपनी सफाई में माइकल ने कहा था- मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैंने किसी की हत्या नहीं की है। इसके बाद उसके वकील ने कोर्ट से माइकल को उम्रकैद की सजा देने की मांग की थी। इस मांग को खारिज कर दिया गया था।

तस्वीर ओक्लाहोमा की उस जेल की है जहां माइकल को कैद में रखा गया था। यहीं उसे सजा दी गई।

एक मौत में लग गए थे 26 मिनट
16 जनवरी 2014 को ओहियो जेल में डेनिस मैक्ग्वायर (53) को जानलेवा इंजेक्शन से मौत की सजा सुनाई गई थी। डेथ चेंबर में डेनिस को लाया गया था। बिस्तर पर लिटाकर हाथ पैर और शरीर बांधा गया था।

दूसरी तरफ मौजूद कमरे में परिजन बैठकर यह नजारा शीशे की दीवार से देख रहे थे। डेनिस को 1989 में 22 साल की गर्भवती महिला से अपहरण कर दुष्कर्म करने और उसे मारने के लिए मौत की सजा मिली थी। करीब 10.27 बजे सुबह उसे लीथल इंजेक्शन लगाया गया। डेनिस का बेटा अपने पिता की घड़ी में समय देख रहा था। वह नोट कर रहा था कि कब उन्हें इंजेक्शन दिया गया।

10.30 बजे डेनिस का शरीर तेजी से उछलने लगा, उनके मुंह से ऐसी आवाजें निकल रही थीं जैसे कोई डूब रहा हो, वे तेजी से बिस्तर पर शरीर को पटक रहे थे। करीब 10.53 बजे डेनिस की मौत हुई। डेनिस की मौत में 26 मिनट लग गए।

40 साल पहले पहली बार इस्तेमाल
7 दिसंबर को 1982 को चार्ल्स ब्रूक्स जूनियर जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा पाने वाला पहला दोषी बना था। अमेरिका के टेक्सॉस में दवाओं के कॉकटेल को ब्रूक्स के शरीर में डाला गया था, जिससे उसका दिमाग और शरीर सुन्न पड़ गया, वो पैरालाइज हो गया और दिल की धड़कनें रुकने से उसकी मौत हो गई।

7 दिसंबर को 1982 को चार्ल्स ब्रूक्स जूनियर जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा पाने वाला पहला दोषी बना था।

जहरीले इंजेक्शन के जरिए हुई इस पहली मौत ने इस बात को लेकर आम लोगों और डॉक्टरों के बीच बहस छेड़ दी थी कि मौत की सजा देने का यह तरीका सही और मानवीय है या नहीं? हालांकि, जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा देने का सिलसिला आज भी जारी है।

जहरीले इंजेक्शन को सजा-ए-मौत देने के दूसरे तरीकों जैसे गैस, बिजली के झटके या लटकाने की तुलना में अधिक मानवीय माना जाता था। इसके पीछे तर्क ये था कि इस इंजेक्शन में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से एक से गहरी बेहोशी आ जाती है, इससे मरने वाले को दर्द नहीं होता। हालांकि, नैतिकता का उल्लंघन मानते हुए कई डॉक्टर जहरीले इंजेक्शन के विरोध में थे, लेकिन इसके बावजूद इसके इस्तेमाल को मंजूरी मिली।

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