इंदौर। वर्ष 1956 में बनी साझेदारी किसना फर्म मैसर्स मुमताज उद्दीन जमीलउद्दीन मालवा मिल चौराह इंदौर में हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए शिकायतकर्ता मोहम्मद यूसुफ द्वारा दिनांक 23.4.2019 को पुलिस थाना एम आई जी में आवेदन प्रस्तुत कर आवेदकगण पर जाली और झूठी पावर ऑफ अटर्नी बनाने का आरोप लगाया गया था. पुलिस द्वारा जांच कर मामले को अहस्तक्षेप योग्य बता कर खात्मा किया गया था परंतु शिकायतकर्ता मोहम्मद यूसुफ द्वारा दबाब बना कर वर्ष 2024 में मामले पर पुनः जाँच करवाई और पुलिस द्वारा आवेदक पर बिना जाँच करे धारा 420.409 और 120-वी भारतीय दंड संहिता के तहत अंतर्गत अपराधिक मुकदमा अपराध क्रमांक 465/2022 दर्ज किया गया था।
लंबे समय से चलते आ रहे मामले में आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राकेश सिंह भदोरिया ने उच्च न्यायालय में एफ आई आर Quashment के लिए याचिका प्रस्तुति की थी जिसमें अधिवक्ता राकेश सिंह भदोरिया और मनवीर गुर्जर द्वारा बहस की गई कि प्रकरण सम्पति विवाद का है जो सिविल प्रकृति का होकर जिसे आपराधिक रंग दिया गया है,, खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के पथात उन्ही तथ्यों और दस्तावेजों पर अभियुक्त के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया है जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, प्रकरण में 10 वर्ष के विलंब का कोई कारण स्पष्ट नहीं किया है।
हाई कोर्ट द्वारा याचिका में दिनांक 1/07/2024 को निर्णय पारित कर प्रकरण को सिवल मामला बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि हिस्सेदारी के लिए सिविल कोर्ट का रास्ता अपनाना चाहिए न की क्रिमिनल कोर्ट का और FIR और सभी अपराधों को रद्ध किया ।
