साइबर क्राइम:शहर में डिजिटल अरेस्ट के 64 पीड़ित; इनमें 2 डॉक्टर, 1 वैज्ञानिक, आईटी सेक्टर के 9 स्टूडेंट्स

By Abhishek Raghuvanshi
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर शहर में तीन महीने में 64 शिकायतें क्राइम ब्रांच के पास पहुंची हैं। इनमें 3 करोड़ 12 लाख रुपए की ठगी बदमाशों ने की है। इन 64 शिकायतों में जितने भी लोग शिकार हुए हैं, वे सभी उच्च शिक्षित हैं। सिर्फ जागरूकता के अभाव में वे बदमाशों के झांसे में आ गए। इन्हें 3 घंटे से लेकर 7 दिन तक ऑनलाइन उन्हीं के घरों में परिवार के सदस्यों को जानकारी दिए बगैर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा।
ये लोग हुए ठगी का शिकार- क्राइम ब्रांच के रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटना का शिकार बने पीड़ितों में 22 वर्ष की उम्र से लेकर 72 साल के सीनियर सिटीजन हैं। इनमें 2 डॉक्टर, आरआर कैट के 1 वैज्ञानिक और 1 रिसर्च स्कॉलर, 2 असिस्टेंट प्रोफेसर, 2 बी-टेक स्टूडेंट्स, 1 इंजीनियर, निजी कंपनी के 2 सीनियर मैनेजर, 4 व्यापारी, 8 हाउस वाइफ, 3 सॉफ्टवेयर इंजीनियर, आईटी कंपनी के 2 एचआर, 9 आईटी सेक्टर के स्टूडेंट्स,
जो पार्सल में ड्रग पकड़ाए जाने के नाम पर डिजिटल अरेस्ट हुए। 3 सीनियर रिटायर टीचर (1 महिला शिक्षिका), टेलीकॉम कंपनी के 4 सीनियर इंजीनियर, 1 कंपनी सेकेट्री, आईडीए के 1 इंजीनियर भी शामिल हैं।
कोई भी जांच एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती
^डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं है। ऐसे फोन कॉल पर ध्यान न दें। कोई भी जांच एजेंसी कभी भी फोन पर कोई वारंट या डॉक्यूमेंट नहीं भेजती, जो आपको किसी केस में फंसा सके। ये संगठित गिरोह है। जागरूक रहना जरूरी है। ऐसे वीडियो कॉल के स्क्रीन शॉट लेकर पुलिस से तत्काल शिकायत करें, ताकि बदमाशों को पकड़ने में मदद मिल सके।

  • राजेश कुमार त्रिपाठी, डीसीपी क्राइम ब्रांच
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