समय पर सीपीआर देकर बचाई थी विधायक मधु वर्मा की जान, डॉ. मोहन सरकार सिपाही को देगी इनाम

By Abhishek Raghuvanshi
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समय पर सीपीआर देकर बचाई थी विधायक मधु वर्मा की जान, डॉ. मोहन सरकार सिपाही को देगी इनाम
दिल का दौरा पड़ने पर तुरंत सीपीआर देना जरूरी है। हाल ही में बीजेपी विधायक मधु वर्मा को सीपीआर से बचाया गया। उनके पीएसओ को पचास हजार रुपये और प्रमोशन दिया जाएगा। सीपीआर से रक्त और ऑक्सीजन का संचार किया जा सकता है, जो जीवन रक्षक है।
इंदौर। यदि किसी व्यक्ति को अचानक दिल का दौरा पड़े और उसकी हालत खराब होने लगे तो पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। साथ ही सीपीआर देकर उसकी जान बचाई जा सकती है। सीपीआर देना बहुत आसान है और आमजन भी इसके लिए पहल कर सकते हैं।
50 हजार रुपये और प्रमोशन देने की घोषणा
गत दिनों विधानसभा क्षेत्र राऊ के भाजपा विधायक मधु वर्मा को तुरंत सीपीआर देकर बचाया गया है। अचानक घर पर दिल का दौरा पड़ने पर वर्मा बेहोश हो गए थे। उनके पीएसओ अरुण भदौरिया ने तुरंत गाड़ी निकलवाकर अस्पताल ले जाने की पहल की।
साथ ही सीपीआर देना शुरू किया। इससे उनकी जान बच गई। पीएसओ की इस सराहनीय पहल के लिए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने उनकी पीठ थपथपाई है। साथ ही 50 हजार रुपये और आउट आफ टर्न प्रमोशन देने की घोषणा भी की।
जीवन रक्षक है सीपीआरसीपीआर
एक जीवन रक्षक तकनीक है और दिल का दौरा पड़ने में कारगर साबित होती है। दिल का दौरा पड़ने पर जब कोई बेहोश हो जाए और सांस नहीं आ रही है तो तुरंत सीपीआर देना चाहिए। सीपीआर के जरिये पीड़ित के शरीर में रक्त और आक्सीजन का संचार किया जा सकता है। आमजन भी यह प्रक्रिया अपनाकर पीड़ित की जान बचा सकते हैं।
ऐसे देते हैं सीपीआर
दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में सीपीआर देकर शरीर के हिस्सों में रक्त संचार को ठीक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए दोनों हाथों को इस प्रकार से जोड़ें जिससे हथेली का निचला हिस्सा छाती पर आए। इस हथेली को छाती के केंद्र के निचले आधे हिस्से पर रखकर दबाएं। 30 बार छाती को दबाएं और फिर दो बार मुंह से सांस दें। यह प्रक्रिया एंबुलेंस आने तक दोहराएं।
हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अल्केश जैन का कहना है कि सीपीआर एक जीवनरक्षक प्राथमिक चिकित्सा प्रक्रिया है। हालांकि यह हार्ट अटैक जैसी स्थितियों में जल्द से जल्द दी जानी चाहिए। छाती को दबाने के साथ सांसों पर भी ध्यान देते रहना चाहिए। सीपीआर का उपयोग केवल तभी करें जब रोगी ने सांस लेना बंद कर दिया हो। इसलिए सीपीआर शुरू करने से पहले व्यक्ति की जांच करें कि वह प्रतिक्रिया कर रहा है या नहीं।

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