
- बिना पंजीयन वालों पर वन विभाग सीधे कार्रवाई कर सकेगा। वन अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने का अधिकार वन विभाग को मिल गया है।
- दर्ज होगा प्रकरण साइटिस प्रजातियों को वन अधिनियम 1972 के अनुसूची
- चार में किया शामिल कपिल नीले
इंदौर। मकाऊ, अफ्रीकी तोते, लव बर्ड, इगुआना, मॉनिटर लिजार्ड सहित विदेशी पशु – पक्षियों का व्यापार करने और घरों में इन्हें पालने वालों के लिए यह खबर थोड़ा झटका दे सकती है। अब इन लोगों को सावधान होने की जरूरत है। केंद्र सरकार के निर्देश पर अब इन प्रजातियों के जानवरों का पंजीयन करवाना अनिवार्य है।
31 अगस्त तक परिवेश पोर्टल पर करना होगा रजिस्ट्रेशन
क्योंकि विदेशी पक्षियों व वन्यजीवों को वन अधिनियम 1972 की अनुसूची चार में शामिल किया गया है। बिना पंजीयन वालों पर वन विभाग सीधे कार्रवाई कर सकेगा। वन अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने का अधिकार वन विभाग को मिल गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परिवेश पोर्टल पर 1 मार्च से 31 अगस्त तक पंजीयन करवाना है।
तीन अलग-अलग प्रारूप में आवेदन करना होगा। साथ ही जानवरों की प्रजातियों के बारे में जानकारी देनी होगी।अधिकारियों के मुताबिक बिना पंजीयन के व्यापार करा और घरों में रखना गैर कानूनी माना जाएगा। जानवरों के जन्म-मृत्यु के बारे में 24 घंटों में बताना जरूरी है। वे बताते है कि कानून में बदलाव करने के साथ ही वन विभाग ने 30 अप्रैल को राजपत्र में जारी कर दिया है।
2 मई को आदेश जारी कर प्रत्येक वन मंडल को जानकारी भेजी है। नहीं होती थी कार्रवाईदेशभर में नहीं पाए जाने वाले वन्यजीवों व विदेशी जानवरों की प्रजातियों को अभी तक वन अधिनियम की धाराओं की कार्रवाई से बाहर रखा गया था। सीधे तौर पर वन विभाग प्रकरण नहीं दर्ज कर पाता था। ऐसे मामलों में सिर्फ आर्थिक अपराध से जोड़कर प्रकरण बनाए जाते थे।
तीन साल पहले भी इंदौर के जूस सेंटर पर विदेशी जानवर मिले थे। उस दौरान भी वन विभाग कार्रवाई नहीं कर पाया था। विदेशों जानवरों की तस्करी रोकने और व्यापार पर नजर रखने के लिए 2021 में मंत्रालय ने विदेशी जानवरों का पंजीयन करने की व्यवस्था रखी।
मगर सालभर बीतने के बाद किसी ने भी केंद्र सरकार को जानवरों के संबंध में जानकारी देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। फरवरी 2024 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2022 के अंतर्गत साइटिस प्रजातियों को अनुसूची-चार में जोड़ा गया है।
विदेशी पक्षियों-जानवरों का रजिस्ट्रेशन, जन्म – मृत्यु की जानकारी संधारण, स्वामित्व हस्तांतरण पर जोर दिया। फरवरी से लेकर अगस्त तक पंजीयन किए जाएंगे। परिवेश 2.0 पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर एक हजार रुपये पंजीयन शुल्क जमा करना है। करना होगा सत्यापन आवेदन करने के बाद क्षेत्रीय वन मंडल कार्यालय को इन प्राणियों का सत्यापन करना है।
इस संबंध में अपनी रिपोर्ट का पोर्टल पर उल्लेख करना होगा। पंजीयन की समयावधि के बाद क्षेत्रीय वनमंडल और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) कार्रवाई करना होगी। अधिकारियों के मुताबिक हर साल व्यापारियों और पशु प्रेमियों को जानवरों संबंधित जानकारी देना होगी। 100 से ज्यादा दुकानें बीते एक दशक में विदेशी पशु-पक्षियों का कारोवार काफी बढ़ा है। शहरभर में 100 से ज्यादा दुकानें हैं। जहां इन जानवरों की खरीदी – बिक्री की जाती है।
नगर निगम के नजदीक बने शिवाजी मार्केट में बाजार संचालित होता है। साथ ही राजेंद्र नगर, अन्नपूर्णा क्षेत्र, साकेत सहित कई इलाकों में दुकानें बनी है। नगर 2021 में परिवेश पोर्टल पर 100 से ज्यादा दुकानदारों ने आवेदन किया था।करवाना होगी जांच- छह महीने के भीतर एक बार इन जानवरों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाना जरूरी है।
वेटनरी डॉक्टर की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपलोड करना होगी
जानवरों के एक से दूसरे स्थान पर पालयन करवाने की स्थिति में नजदीक वन विभाग कार्यालय में 24 घंटों के भीतर सूचना देना होगी। विदेशी प्रजातियों वाले जानवरों की देशी नस्ल के जानवरों से क्रॉस ब्रीडिंग करवाना गैर कानूनी होगी।
जानवरों के जन्म – मृत्यु के बारे में नियमित सूचना देना अनिवार्य है
ब्रिडिंग सेंटर के लिए भी मापदंड बनाए गए है, जिसमें सेंटर संचालकों को जानवरों की क्रॉस ब्रीडिंग के बारे में जानकारी देना है। सत्यापन के दौरान उल्लंघन होने पर सेंटर को बंद किया जाएगा। पंजीयन के बाद सत्यापनविदेशी पक्षियों व जानवरों के
पंजीयन को लेकर 31 अगस्त तक का समय है।
इसके बाद वन विभाग इन प्रजातियों के वन्यप्राणियों का सत्यापन किया जाएगा। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करेंगे। – महेंद्र सिंह सोलंकी, डीएफओ, इंदौर वन मंडल

