
कंप्यूटर में वायरस आ जाए तो एंटीवायरस डालते हैं, जीवन में दुखों का वायरस आ जाए तो प्रभु की शरण में जाए
मंत्री और विधायकों ने भी किया व्यास पीठ का पूजन उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पहुंचे कथा पंडाल
इंदौर। आज के अत्याधिक दौर में हम सोशल मीडिया और कंप्यूटर का भरपूर उपयोग करते हैं कंप्यूटर में वायरस ना आए इसलिए एंटीवायरस डालते हैं और जीवन में दुख और तकलीफों का वायरस ना आए इसके लिए प्रभु शरण में जाना चाहिए, शुरू से ही भक्ति मार्ग पर रहोगे तो जीवन में दुख रूपी वायरस कभी आएगा ही नहीं।
यह विचार कनकेश्वरी गरबा ग्राउंड पर श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने व्यक्त किए। सोमवार को कथा के दूसरे दिन कथा स्थल पर मुख्य यजमान अक्षत रामचंद्र चौधरी एवं बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि भी पहुंचे मुख्य रूप से उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तुलसीराम सिलावट विधायक रमेश मेंदोला आदि गणमान्य जन्म प्रमुख रूप से उपस्थित थे इसको हर बार को करना पड़ेगा। व्यास पीठ से श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि भगवान की कथा का श्रवण बार-बार करना चाहिए इससे सद्विचार आएंगे जीवन में सब विचारों से ही हम मन को शुद्ध रख पाएंगे और संसार में मन विचलित ना हो इसके लिए भगवान की कथा में बार-बार जाएं और स्वयं के लिए सद मार्ग का द्वार खोलें क्योंकि संसार में कई प्रकार की घटनाएं वस्तुएं आपका ध्यान भटकाएंगी और इसी भटकाव को दूर करने के लिए भगवान की शरण में जाना जरूरी है। कनकेश्वरी गरबा ग्राउंड पर श्रीमद् भागवत कथा 4 में तक रोजाना शाम 4बजे से 7 तक आयोजित की जा रही है।
संगत का जीवन पर प्रभाव पड़ता ही है
व्यास पीठ से श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि हम सब की संगति और साथ रहने वाले लोगों का असर हमारे जीवन पर बहुत गहरा पड़ता है सभी को आवश्यकता है कि उनके बच्चे किसके साथ उन किन आचरण वाले व्यक्ति के साथ रह रहे हैं यह ध्यान रखना चाहिए अच्छे आचरण वाले लोगों और संत महात्माओं का सानिध्य रहेगा तो वह मंदिर जाएंगे सद्मार्ग पर रहेंगे जीवन में सही दिशा की ओर आगे बढ़ेंगे अगर वह गलत लोगों के साथ रहेंगे तो उनका जीवन कठिनाइयों और संताप से भरा रहेगा इसलिए जीवन में सही संगत होना जरूरी है।
मन को खराब करती है वासनाएं
श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने व्यास पीठ से कहा कि कपड़ा खराब हो जाए तो हम डिटर्जेंट से धोते हैं मन वासनाओं से खराब हो जाए तो सफाई के लिए भक्ति ही एकमात्र माध्यम है जिससे मन को निर्मल बनाया जा सकता है ।
चरित्र की सुगंध युक्त बनाओगे तो जीवन धन्य होगा
शास्त्री जी ने व्यास पीठ से कहा कि कितना भी महंगा इत्र हो उसकी खुशबू 5/7 दिन से ज्यादा नहीं रह सकती लेकिन अगर अपने चरित्र को ही सुंदर और सुशील बना लिया तो इसकी खुशबू आपका संसार से चले जाने के बाद भी रहेगी यानी चरित्र की सुगंध आपके जीवन को होने और उसके बाद भी बनाए रखेगी इसलिए अपने चरित्र को सुगंध की भांति बनाए रखें ताकि संसार से जाने के बाद भी लोग आपको अपने स्मरण में याद रखें
भगवान का चित्र जेब में नहीं ,दिल में रखने की आवश्यकता
व्यास पीठ से शास्त्री जी ने कहा कि धर्म साधना भी कई प्रकार की होती है कलयुग में लोग दिखावे के लिए भगवान के भक्त बनते हैं उनके चित्र को जेब में रखते हैं हनुमान जी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोग बड़ी संख्या में हनुमान जी की भक्ति करते हैं और हनुमान जी का चित्र भी जेब में रखते हैं जबकि हनुमान जी का चित्र जेब में नहीं हनुमान जी को दिल में रखने की आवश्यकता है तो सभी बढ़ाएं दूर हो जाएंगे

