स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर इंदौर की सेंट्रल जेल में बंद 15 कैदियों को उनके आचरण के चलते रिहाई प्रदान की गई है बता दे केंद्र और राज्य सरकार के यह आदेश हैं कि जो भी कैदी सजा के दौरान जेल के अंदर बंद रहेगा यदि उनके आचरण ठीक है तो उन्हें उनकी सजा कंप्लीट होने से पहले माफी दी जा सकती है और इसी के चलते इन कैदियों को आज रिहा किया गया है।
– इंदौर की सेंट्रल जेल में तकरीबन कई कैदी बंद है तो वहीं 15 अगस्त ,26 जनवरी ,अंबेडकर जयंती और 2 अक्टूबर को जिन कैदियों के आचरण ठीक रहते हैं उनको जेल से रिहाई मिलती है और इसी क्रम में आज 15 अगस्त के उपलक्ष्य पर जेल में बंद 15 कैदियों को रिहाई प्रदान की गई है बता दे जिन कैदियों को रिहाई प्रदान की गई है, वह जेल के अंदर हत्या जैसे गंभीर अपराध में सजा काट रहे थे और अपराध होने के बाद उन्हें जहां अपराध को लेकर पछतावा था तो वहीं उन्होंने जेल के अंदर सजा काटने के दौरान पश्चाताप भी किया और जेल के अंदर अपना आचरण ठीक रखा इसका नतीजा यह रहा कि उन्हें उनकी सजा पूरी होने से पहले रिहाई मिल गई है वहीं जेल के अंदर रहते हुए कई कैदियों ने अलग-अलग तरह से काम भी किया, कुछ लोगों ने जेल के अंदर रहते हुए फर्नीचर की कारीगरी की तो किसी ने कटोरी चम्मच बर्तन बनाने का काम किया और इस माध्यम से जो रुपया मिला वह रिहाई के दौरान इन कैदियों को दिया गया है, बता दे 15 कैदी जो रिहा हुए वह जेल के अंदर से तकरीबन दो लाख रूपए लेकर अपने घर जा रहे हैं वही एक कैदी को तकरीबन 48000 मिले हैं उसने जेल के अंदर रहते हुए अलग-अलग तरह के फर्नीचर बनाए थे इसी के चलते उसे 48000 का पारिश्रम मिला, वही जो कैदी जेल के अंदर से रिहा हुए उनका कहना था की घटना को लेकर हमें काफी पछतावा है और उसका पश्चाताप भी हमने कर लिया है और अब कभी हम किसी भी तरह का कोई अपराध नहीं करेंगे। वहीं जेल के अंदर पत्नी के द्वारा आत्महत्या करने के बाद जिस पति को सजा मिली वह भी आज रिहा हुआ इस दौरान उसका कहना था की पत्नी ने शंका के चलते खुद ही आत्महत्या कर ली थी और पुलिस ने कार्रवाई कर मुझे दोषी पाया इसके बाद कोर्ट ने मुझे सजा दी और उसके बाद मैंने उस सजा का पश्चाताप किया।
