- विजय नगर निवासी व्यापारी का विवाह 23 फरवरी 2000 को हुआ था। विवाह से उन्हें 20 वर्षीय बेटी भी है जो उन्हीं के साथ रहती है। फरवरी 2023 में व्यापारी का आपसी सहमति से अपनी पत्नी से तलाक हो गया था।
- आपसी सहमति से तलाक लेने और इसके एवज में 50 लाख रुपये प्राप्त करने के बावजूद महिला ने अपने पूर्व पति और बुजुर्ग सास-ससुर के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण वापस लेने का वादा पूरा नहीं किया।
हाई कोर्ट ने बेइमानी मानते हुए महिला पर एक लाख रुपये हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि महिला के पूर्व पति को मिलेगी। कोर्ट ने माना कि महिला ने अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। 12 पेज के आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला पर जुर्माना इसलिए लगाया जा रहा है ताकि इससे अन्य लोगों को सबक मिले।
विजय नगर निवासी व्यापारी का विवाह 23 फरवरी 2000 को हुआ था। विवाह से उन्हें 20 वर्षीय बेटी भी है जो उन्हीं के साथ रहती है। फरवरी 2023 में व्यापारी का आपसी सहमति से अपनी पत्नी से तलाक हो गया था। इस समझौते के बदले उन्होंने 50 लाख रुपये पत्नी को दिए थे।
आपसी सहमति के मुताबिक उनकी पत्नी को वर्ष 2018 में पति और सास-ससुर के खिलाफ क्रूरता और अन्य धाराओं में दर्ज आपराधिक प्रकरण वापस लेना था, लेकिन पत्नी ने ऐसा नहीं किया। इस पर व्यापारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्रकरण खुद के और माता-पिता के खिलाफ दर्ज प्रकरण निरस्त करने की गुहार लगाई।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने याचिका स्वीकारते हुए कहा कि तलाक आपसी सहमति से हुआ था। इसके एवज में महिला ने पूर्व पति से 50 लाख रुपये प्राप्त भी कर लिए लेकिन उसने वादे के मुताबिक पति और सास-ससुर के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापस नहीं किया।
ऐसा लगता है महिला अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही है। कोर्ट ने पूर्व पत्नी पर एक लाख रुपये हर्जाना लगाया है। उसे यह रकम चार सप्ताह में पूर्व पति के बैंक खाते में ट्रांसफर करना होगी।
