इंदौर- हरदा हादसे के बाद अलर्ट पर आए सराफा बाजार की अग्नि सुरक्षा जांचने के लिए टीम गठित की गयी थी।टीम ने शुक्रवार दोपहर नगर निगम मुख्यालय पर गैस कम्पनी संचालको के साथ बैठक की वही रात में बाजार का दौरा किया। दौरे के दौरान को यहां गैस सिलेंडरो की भरमार मिली इसको लेकर कमेटी ने चिंता जाहिर की। कमेटी की अध्यक्षता कर रहे राजेन्द्र राठौर ने चिंता जाहिर कर कहा की सराफा बारूद के ढेर पर है वही निरंजन सिंह चौहान ने कहा कि यह तो ईश्वरीय कृपा ही है कि यहां अब तक कुछ नहीं हुआ । कमेटी ने इस बाजार से गैस सिलेंडर हटाकर गैस की पाइपलाइन बिछाने के लिए गैस कम्पनी को सर्वे कर 4 दिन में रिपोर्ट मांगी है ।
गैस कम्पनी से माँगी सर्वे कर रिपोर्ट
दरअसल सराफा बाजार शहर की पुरानी पहचान है। लेकिन हरदा हादसे के बाद इस बाजार को शिफ्ट करने या गैस सिलेंडर के उपयोग जैसे कई सुझावों पर विचार किया जा रहा था।इसको लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को अलग-बिन्दुओ पर पड़ताल करना थी। टीम ने शुक्रवार दोपहर गैस कंपनी के अधिकारी के संग बैठक की।बैठक का उद्देश्य था की इस बाजार में गैस लाइन डल जायेगी।जिससे गैस सिलेंडर का उपयोग कम होगा और हादसे की संभावना कम होगी। गैस कम्पनी को बाजार में जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए है। और 20 तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर देने के लिए कहा है। इसके बाद आगे की जांच तय होगी और उसी के आधार पर सराफा चौपाटी का स्वरुप तय होगा।
सिस्टम इंस्टॉल करने में आएगी दिक्कत
बैठक में मौजूद गैस कम्पनी के अफसर ने इस बाजार तक गैस लाइन लाने और सिस्टम इंस्टाल करने में परेशानी होने का दावा किया है।जानाकरी है कि अफसरों ने कहा था की यहां बेहद तंग गलियां है इस कारण से इसमें पाइपलाइन डालने वाली मशीन का ही जाना सम्भव नहीं होगा।
सराफा बारूद का ढेर
एमआइसी सदस्य राजेन्द्र राठौर के मुताबिक़ सराफा शहर की पहचान हुआ करती थी।लेकिन अब यह बारूद का ढेर हो गया है।यहां अत्यधिक गैस सिलेंडर है,इश्वर की कृपा ही है कि अब तक यहां कुछ नहीं हुआ। यहां अलग अलग चरण में लोगो से चर्चा होगी,एक बाजार वो जो दिन में लगता है ,दुसरा यहां के रहवासी, तीसरा रात्रिकालीन चौपाटी और चौथे वो जो यहां रहते है। इन सबसे चर्चा के बाद ही तय होगा कि इस बाजार का क्या करना है। दिन में गैस लाइन डालने के लिए कम्पनी से बात की थी वह भी सर्वे करेंगे
अंदर वाहन लाने में भी दिक्कत
स्थानीय रहवासी दीपक कटारिया के मुताबिक़ कुछ समय पहले पिता जी बीमार हुए थे उन्हें दो पहिया वाहन पर ले जाना पड़ा था, क्यूंकि यहां से आने जाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल ही नहीं कर सकते इतनी भीड़ रहती है। किसी दिन हादसा हुआ तो यहां वाहन भी नहीं पहुंच पाएंगे।
