भ्रष्टाचार के मामले मे (डिप्टी कलेक्टर) सहित उसकी पत्नी, पुत्रियॉ, दामाद, समधन की 1 करोड 28 लाख की चल- अचल संपत्ति अधिहरण किये जाने का माननीय न्यायालय ने दिया आदेश

By Abhishek Raghuvanshi
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माननीय न्यायालय- श्री गंगाचरण दुबे, मध्ययप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम 2011 के तहत गठित विशेष न्याायालय, इंदौर ने विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 20/2017 में आदेश पारित करते हुए प्रभावित व्यक्तिगण हुकुमचंद सोनी पिता केसरीमल सोनी उम्र 64 वर्ष तत्कािलीन डिप्टी् कलेक्टटर शाजापुर निवासी 674 वैशाली नगर मंगल कालोनी उज्जै‍न (वर्तमान में मृत), प्रभावित व्‍यक्ति पत्नी श्रीमती सुषमा एवं पुत्रियॉ अंजली, सोनालिका, प्रीती, सरिता, प्रमिला (मृत) , एवं रेखा वर्मा पति भरतकुमार वर्मा सोनालिका की सास , अजय वर्मा दामाद हुकुमचंद सोनी की चल-अचल संपत्तिया एवं बीमा पॉलिसियो से उक्त राशि वसुली करराजसात करने हेतु कलेक्टंर उज्जैन को आदेशित किया!

न्यायालय ने अपने सौ पृष्ठीय निर्णय में प्रभावित व्यक्ति डिप्टी कलेक्टर हुकुम सोनी की अनुपात ही संपत्ति 355.96/: पाते हुए पाते हुए निर्णीत किया कि जिस प्रकार मछली जल में तैरते हुए कब जल पी लेती है ज्ञात करना संभव नहीं, उसी प्रकार शासकीय सेवक के भष्टाचार को पकड़ना मुश्किल है ! शासकीय सेवक का भ्रष्टाचार समाज व प्रशासन को प्रभावित करता है तथा भ्रष्ट आचरण प्रभावित व्यक्ति के जीवन पर्यंत और मृत्योपरान्त भी उसके कृत्यों से परिलक्षित होता है !भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में दंड का उद्देश भर्त्सना और निवारक होता है ऐसे अपराधों के अधीन अपराधों के कतिपय वर्ग के त्वरित विचारण और ऐसे मामलों में अंतरवलित सम्पत्तियों का अधिग्रहण करने के उद्देश्य से ही विशेष न्यायालय अधिनियम अधिनियमित किया गया है ,जिसमें लोक सेवक के पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति का पाया जाना उसका अनुपात हीन होना तथा ततसंबंध में स्पष्ट विवरण न होने पर सामान्य धारणा को प्रतिस्थापित करता है कि कर्मचारी ने संनिष्टा में कमी करते हुए भ्रष्ट तरीक़ों से संपत्ति अर्जित की है और ऐसी संपत्तियों का अर्जन उनके संबंध में लेखा विवरण के सतुष्टीकारक न पाया जाना कदा चरण है और आपराधिक अवचार को गठित करता है जिससे ऐसे निंदनीय कृत्य में भ्रष्टाचारियों के प्रति कोई उदारता न बरतते हुए संलिप्त संपत्ति का संपूर्ण अधिहरण ही न्यायोचित और विधि सम्मत होता है जिससे हुकुम सोनी की 1,18,819 रुपया की संपूर्ण चल अचल संपत्ति राजसात की जाती है

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