आईपीएस संतोष कुमार सिंह अब इंदौर के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। वर्तमान कमिश्नर राकेश गुप्ता को सीएम का ओएसडी बनाया गया है। सिंह पहले इंदौर डीआईजी रह चुके हैं। वे सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उनके कमिश्नर बनने के बाद इंदौर की जनता को सख्त पुलिसिंग की उम्मीद है। वहीं सिंह के सामने थानों का सिस्टम सुधारने से लेकर ट्रैफिक को ठीक करना, नशे पर नियंत्रण के साथ अपराधों पर काबू करना बड़ी चुनौतियां होंगी। भास्कर ने शहर के आमजन से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग से जाना कि वे नए पुलिस कमिश्नर से क्या अपेक्षा रखते हैं।
इन 10 चुनौतियों पर सख्ती करने से इंदौर को मिलेगी राहत
- थानों का शिकायत सिस्टम सुधारना: थाने में शिकायत लेकर आने वाले पीड़ितों की सुनवाई आसानी से नहीं होती है। थाना प्रभारी मिलते नहीं हैं। स्टाफ हर मामले में समझौते के लिए शिकायतकर्ता पर दबाव बनाते हैं।
- बदहाल ट्रैफिक सिस्टम: लोग जाम से परेशान हैं। ट्रैफिक अफसरों के फील्ड मूवमेंट नहीं करने पर उन्हें परेशानी नहीं दिखती। चौराहों पर नया स्टाफ तैनात रहता है, जो नियम तोड़ने वालों पर सख्ती नहीं कर पाता।
- ड्रग्स पर नियंत्रण: बीते कुछ सालों में मुंबई, गुजरात और राजस्थान से कई ड्रग माफिया इंदौर को सेंट्रल पॉइंट बनाकर नेटवर्क खड़ा कर चुके हैं। मोहल्ले, बस्तियों के अलावा पब-बार में बेखौफ पैडलर सक्रिय हैं।
- क्राइम ब्रांच का स्वरूप बदलना: पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद से क्राइम ब्रांच कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई है। हत्या, अंधे कत्ल, ड्रग माफिया के संगठित गिरोह और डिजिटल अरेस्ट के प्रकरणों में कोई गैंग व आरोपी नहीं पकड़े। केवल छोटे-मोटे ड्रग पैडलर व अपराधी पकड़ में आए।
- रात्रि गश्त व्यवस्था ठप: सिर्फ वीक एंड पर पुलिस सड़कों पर नजर आती है। वह भी कुछ एक स्थानों पर। चोरी, लूट और छेड़छाड़ की घटनाओं से आमजन परेशान है।
- नशाखोरों पर सख्ती नहीं: रात होते ही नशाखोर बदमाश सक्रिय हो जाते हैं। परिवार के साथ निकलने वालों को तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ाने वालों से खतरा रहता है। ऐसे बदमाशों पर सख्त पुलिसिंग की जरूरत होगी।
- महिला अपराध: महिला व लैंगिक अपराध बढ़ रहे हैं। सेक्स ऑफेंडर्स व नाबालिगों से वारदातें करने वाले बदमाशों पर कंट्रोल करना होगा।
- फील्ड पुलिसिंग की दरकार: कमिश्नरी लागू होने के बाद अफसरों की फील्ड पुलिसिंग कम हुई है। थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में जनता से सीधे कभी नहीं जुड़े। इसे सुधारने की जरूरत है।
- पुलिस जनसुनवाई: प्रति मंगलवार को होने वाली पुलिस जनसुनवाई से जनता का मोह भंग हो गया है। क्योंकि, अफसर जो भी कार्रवाई के निर्देश देते हैं, थाने जाने पर पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता।
- अफसरों में सामंजस्य की कमी: चार जोन में बैठे अफसरों में सामंजस्य नहीं दिखता। मनमुटाव व मनमानी से लोग परेशान है।
