आरोपी ने पांच कोरे चेक पर साइन करवा लिए। उसका वीडियो भी बनाया और करीब 4 घंटे बाद कनाड़िया थाना से 3 किमी दूरी पर छोड़ कर भाग गए। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें लसूड़िया थाना में पदस्थ हवलदार ज्ञानेंद्र की बाइक की नंबर प्लेट मिली। गया प्रसाद ने पार्टनरशिप में बायपास पर करोड़ों रुपये कीमती जमीन खरीदी थी।
रास्ते में कार से टक्कर मारकर व्यापारी को रोका।
पिस्टल अड़ाकर बदमाश साथ ले गए और धमकाया।
वीडियो बनाकर चार घंटे बाद थाने के पास छोड़ गए।
इंदौर। करोड़ों रुपए कीमती प्रॉपर्टी के विवाद में भोपाल के प्रॉपर्टी व्यवसायी गया प्रसाद उर्फ जीपी पाल का कार सवारों ने अपहरण कर लिया।आरोपियों ने कनपटी पर पिस्टल रखकर कोरे चेक पर साइन करवाए और उसका वीडियो बना लिया। साजिशकर्ता दतिया का प्रोपर्टी कारोबारी रामभरोसी गुर्जर बताया जा रहा है। कनाड़िया टीआई केपी यादव के मुताबिक इंड्स गार्डन फेस-1 भोपाल निवासी गया प्रसाद पाल दोपहर करीब 12 बजे एसडीएम कोर्ट से पेशी कर टाटा सफारी(एमपी 04 जेडएच 0555) से दोस्त पंकज शर्मा के साथ विजयनगर जा रहा था।
बगैर नंबर की बाइक से पीछा
तहसील कार्यालय के समीप पहुंचते ही बगैर नंबर की बाइक और जीप(थार) ने पीछा करना शुरू कर दिया। गया प्रसाद बच कर आगे निकला लेकिन तभी तेज रफ्तार में बगैर नंबर की सफेद रंग की कार ने टक्कर मार दी।
गाड़ी रोकते ही कार से निक्की शर्मा ने चार साथियों की मदद सिर पिस्टल अड़ाकर गया प्रसाद का अपहरण कर लिया। आरोपियों ने कार में गया प्रसाद की पिटाई की और कनपटी पर पिस्टल अड़ा दी।
आरोपी ने पांच कोरे चेक पर साइन करवा लिए। उसका वीडियो भी बनाया और करीब 4 घंटे बाद कनाड़िया थाना से 3 किमी दूरी पर छोड़ कर भाग गए। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और आरोपियों की घेराबंदी की। पुलिसकर्मी की बाइक से पीछा कर रहे थे अपहरणकर्ता आरोपियों ने जिस कार से टक्कर मारी वह बंद होने के कारण छोड़ दी थी।
पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसमें लसूड़िया थाना में पदस्थ हवलदार ज्ञानेंद्र की बाइक की नंबर प्लेट मिली। पुलिस ने ज्ञानेंद्र को थाने बुलाया तो आरोपितों का नाम बताया। गया प्रसाद ने पुलिस को बताया उसका दतिया के राम भरौसी गुर्जर से विवाद चल रहा है।
गया प्रसाद ने पार्टनरशिप में बायपास पर करोड़ों रुपये कीमती जमीन खरीदी थी। पार्टनर में उसको लेकर विवाद हो गया था। गया प्रसाद का भाई गौतम पाल लसूड़िया थाना में हवलदार है। उसका आरोप है कि FIR करने में काफी देर लगाई। एक एसआई ने तो थाने में ही धमकाया।
