डीएवीवी पेपर लीक कांड : देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में आज उच्च शिक्षा आयुक्त निशांत वरवड़े खुद ही पहुंच गए। जानकारी के मुताबिक इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ जब इस तरह के बैठक में आयुक्त शामिल हुए हों।
कॉलेज प्राचार्य ने थाने के बजाए पेपर के बंडल अपने रूम में ही रखवा लिए थे।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की समिति ने जांच पूरी कर ली है।
विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में 13 मुद्दे रखे गए हैं।
पेपर लीक केस में आइडलिक कालेज का नाम आया था सामने।
इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में बुधवार को पेपर लीक कांड की जांच रिपोर्ट खोली गई। इसमें पेपर आउट करने वाले आइडलिक कालेज के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले पर लीपापोती कर दी। कार्यपरिषद के सदस्यों ने कालेज पर पांच लाख रुपये आर्थिक दंड लगाया है। इसके अलावा तीन साल के लिए कालेज को परीक्षा केंद्र नहीं बनाने का फैसला लिया गया। उल्लेखनीय है कि आइडलिक कालेज कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए अक्षयकांति बम का है। इस मामले में परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाली कालेज प्राचार्या डा. बबीता काडकिया को भी कार्रवाई के दायरे में नहीं लिया। जबकि उन्होंने समिति के सामने प्रश्न पत्र का बंडल थाने की बजाय प्राचार्य कार्यालय में रखने की बात स्वीकारी थी और बकायदा माफीनामा भी लिखकर दिया है। प्राचार्य की गलती की वजह से विश्वविद्यालय को दो विषयों की दोबारा परीक्षा करवानी पड़ रही है। करीब 12 हजार छात्र-छात्राएं पेपर लीक होने से प्रभावित हुए हैं।
क्या पेपर लीक हुआ है…
बुधवार दोपहर 12 बजे कार्यपरिषद की बैठक शुरू हुई। शुरुआत में कुछ सदस्यों ने जांच रिपोर्ट खोलने के बारे में पूछा तो कुलगुरु डा. रेणु जैन ने टाल दिया। आधे घंटे बैठक होने के बाद अचानक उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त निशांत बरवड़े भी पहुंचे। कुछ देर तक विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। बाद में सदस्यों ने जांच रिपोर्ट के बारे में कहा तो आयुक्त बरवड़े ने कहा कि क्या कोई पेपर लीक कांड हुआ है। मुझे नहीं पता है। बैठक के तीन घंटे बाद पेपर लीक कांड से जुड़ी जांच रिपोर्ट रखी गई। समिति ने 14 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें आइडलिक के अलावा एक और कालेज पर संदेह जताया गया है, क्योंकि संघवी कालेज की तरफ से लौटाए गए प्रश्न पत्र के बंडल में लिफाफों से छेड़छाड़ की गई है। कई विषयों के लिफाफे खुले हुए मिले हैं।
सदस्यों ने 10 मिनट से ज्यादा रिपोर्ट पर चर्चा की। रिपोर्ट खोलते ही कुछ सदस्य कालेज के बचाव में उतर आए। उन्होंने कहा कि अभी पुलिस की जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए रिपोर्ट खोलना उचित नहीं होगा। आयुक्त ने कहा कि कालेज पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाना चाहिए। सदस्य इस पर राजी हो गए।
कालेज संबद्धता निरस्त नहीं करने के पीछे सदस्यों ने विद्यार्थियों की आड़ ली और कहा कि वहां अभी कई विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। तुरंत ऐसा करना उचित नहीं होगा। आनलाइन पेपर भेजने पर होगी व्यवस्था पेपर लीक कांड के बाद विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रों पर आनलाइन पेपर भेजने की व्यवस्था की जाएगी, साथ ही उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन भी आनलाइन करने का विचार किया जा रहा है। इस संबंध में बैठक में एक समिति बनाकर प्रस्ताव तैयार करने की बात कही है, जो अगली कार्यपरिषद में रखा जाएगा।
करेंगे सख्त कार्रवाई
पेपर लीक कांड में कालेज पर आर्थिक दंड लगाया है। कालेज की संबद्धता को लेकर छात्र हित में निर्णय लिया जाएगा। अभी पुलिस की जांच चल रही है। दोषियों पर जरूर सख्त कार्रवाई की जाएगी। – निशांत बरवड़े, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग बनाएंगे समिति कालेज की संबद्धता निरस्त करने का अभी कोई फैसला नहीं लिया है। उसके लिए एक समिति बनाई जाना है। वह कालेजों में जाकर जांच करेगी। उनकी रिपोर्ट के बाद फैसला लिया जाएगा। – डा. रेणु जैन, कुलगुरु, डीएवीवी
